हिसार। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने सेक्टर वासियों को छह माह बाद पानी व सीवर के बिल भेजने शुरू कर दिए हैं। एक साथ छह माह के बिल भेजे जाने से सेक्टरवासियों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। बता दें कि पिछले दो साल से एचएसवीपी सेक्टरवासियों को नियमित रूप से पानी व सीवर के बिल नहीं भेज जा रहे हैं। नियम के अनुसार विभाग को हर दो माह पानी के बिल भेजने होते हैं।
एचएसवीपी के अनुसार 10 रीडिंग तक प्रति यूनिट ढाई रुपये, 11-20 यूनिट का 5 रुपये, 21 से 30 यूनिट के 8 रुपये और 31 से अधिक यूनिट के 10 रुपये प्रति यूनिट शुल्क लिया जाता है। वहीं पानी के बिल का 25 प्रतिशत सीवर के बिल के रूप में चुकाना होता है।
कनेक्शनों का आंकड़ा
सेक्टर पेयजल कनेक्शन
1-4 950
3-5 150
9-11 2800
13 1680
14 2100
14 पार्ट टू 250
15 1000
16-17 2400
21 500
33 400
पीएलए 1175
अर्बन एस्टेट 1650
दो साल से गड़बड़ाई हुई है व्यवस्था
पानी व सीवर के बिल देने को लेकर पिछले दो साल से एचएसवीपी की व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। वित्त वर्ष 2020-21 में भी विभाग ने एक साथ सात माह के पानी व सीवर भेजे थे। इस साल विभाग का तर्क था कि कोरोना की वजह से नया टेंडर नहीं लग सका था। वहीं वित्त वर्ष 2021-22 में भी छह माह का इकट्ठा बिल सेक्टरवासियों को थमाए गए थे। इस साल भी विभाग का यही तर्क था।
सेक्टरों में पानी व सीवर के बिल भेजने शुरू कर दिए हैं। जल्द ही सभी बिलों का वितरण कर दिया जाएगा। - पवन वर्मा, एक्सईएन, एचएसवीपी
जलघर की चहारदीवारी के लिए तैयार किया डेढ़ करोड़ का एस्टीमेट
तोशाम रोड स्थित जलघर की चहारदीवारी को लेकर विभाग ने एक करोड़ 52 लाख 45 हजार रुपये का एस्टीमेट तैयार किया है। एस्टीमेट को मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा गया है। बता दें कि यह जलघर करीब 150 एकड़ में बना हुआ है। जलघर की कहीं-कहीं चहारदीवारी न होने के कारण पशु घूमते रहत हैं। सेक्टरवासियों ने इसे लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया था।
निर्माण के दौरान पड़ोसी मकान को पहुंचा नुकसान तो कमेटी करेगी आकलन
सेक्टरों में बड़ी संख्या में पार्किंगशुदा चार मंजिला मकानों का निर्माण किया जा रहा है। एचएसवीपी को काफी शिकायतें मिली हैं, जिनमें इन मकानों के कारण साथ लगते मकानों को नुकसान पहुंच रहा है। इसी को लेकर विभाग ने कमेटी का गठन किया है, जिसमें संपदा अधिकारी, एक एसडीओ, एक जेई व एक स्ट्रक्चर इंजीनियर होगा। शिकायत मिलने पर यह कमेटी तुरंत मौके का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन करेगी। साथ ही निर्माण कार्य को भी रुकवाएगी। उक्त मकान की मरम्मत व मकान मालिक की संतुष्टि के बाद ही रुके हुए निर्माण कार्य को दोबारा से शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।