हिसार। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में 18 दिन से आंदोलनरत विद्यार्थियों ने शुक्रवार शाम रोष मार्च निकालकर हक की आवाज बुलंद की। इससे पहले हॉस्टल और मेस बंद करने पर विद्यार्थियों और हॉस्टल प्रशासन के बीच दिनभर गहमागहमी का माहौल रहा।
छात्राओं और छात्र कल्याण निदेशक के बीच बातचीत का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक छात्रा हाथ जोड़कर पूछ रही है कि उन्होंने ऐसा क्या अपराध किया है कि उनका खाना बंद कर दिया। मेस चालू नहीं की गई तो वे भूख हड़ताल शुरू कर देंगी।
विद्यार्थी सुबह 9 बजे छात्र कल्याण निदेशक (डीएसडब्ल्यू) डॉ. एसके पाहुजा के कार्यालय पहुंचे। छात्राओं ने कहा इससे पहले भी समर वैकेशन आते रहे हैं और मेस चलती रही है तो इस बार ऐसा क्या हो गया कि बंद की जा रही है।
डीन पीजीएस डॉ. केडी शर्मा व अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग मौके भी इस दौरान मौजूद रहे। छात्राओं ने सवाल किया कि क्या खाना खाना मानव अधिकारों के खिलाफ है। वीरवार रात 11 बजे पुलिस वालों ने हमें खाना खिलाया। सुबह हॉस्टल वार्डन ने मेस पर ताला लगवा दिया और कहा- यहां खाना नहीं खाने दूंगी।
हमारे घर वालों ने आपके भरोसे छोड़ा है : छात्राएं बोलीं कि हम सब सुबह से भूखे खड़े हैं। घर वालों ने यहां आपके भरोसे छोड़ा है। पाहुजा ने कहा कि यह रूटीन प्रक्रिया है। परीक्षाएं होने के बाद हॉस्टल मरम्मत आदि के लिए खाली करवाए जाते हैं। एक छात्रा ने कहा कि मेरी 10 दिन में थीसिस जमा होनी है। मुझे लेट फीस एक्सटेंशन दी है। अब मैं कैसे घर चली जांऊ। घर जाऊंगी और फिर दो दिन बाद आऊंगी। मुझे कितनी परेशानी झेलनी पड़ेगी। आप समझो सर...। हम आपकी बेटी के बराबर हैं।
यह जानकर हमारे घर वालों की क्या हालत होगी कि यहां खाना ही नहीं मिल रहा। एक और छात्रा ने कहा- रात को हॉस्टल वार्डन से कहा कि हमें भूख लगी है। आप डीएसडब्ल्यू सर को बुला दो। हमें उनसे बात करनी है। मगर उन्होंने कहा कि अब तुम्हारी बात सुनने कोई नहीं आएगा।
इस पर पाहुजा ने कहा कि तुम मिलते ही कहां हो। हमने तुम्हारे हाथ जोड़ लिए, पैर पकड़ लिए। तुमने जवाब दिया कि हम तो सरकार से बात करेंगे। छात्रा ने कहा कि अगर हमें खाना नहीं दिया जाता है तो भूख हड़ताल पर बैठ जाते हैं और यहीं निपट जाएंगे। एक छात्र ने कहा कि जब हॉस्टल की छत गिरी थी तब रिनोवेशन दिखाई नहीं दिया।