बगला गांव के युवक की हत्या मामले में दूसरे दिन भी तनाव बना रहा। गुस्साए ग्रामीणों और बसपा नेताओं ने शव नहीं उठाया।
युवक के परिजनों सहित 100 से अधिक महिला-पुरुष अस्पताल के पार्क में धरने पर बैठे रहे। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और प्रदेश स्तर पर आंदोलन ले जाने की चेतावनी दी। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश भी की, लेकिन परिजन मांगों पर अड़े रहे।
उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन 25 लाख रुपये मृतक के परिवार को मुआवजे के तौर पर और मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी नहीं देता वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन की तरफ से सामान्य अस्पताल में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
प्रशासन की तरफ से दोपहर को डीएसपी विनोद चालिया व एसडीएम अशोक बंसल मौके पर पहुंचे और शव के दाह संस्कार के लिए लोगों को समझाने का प्रयास किया। मौके पर धरनारत लोग बिफर पड़े और डीसी और एसपी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
इस दौरान डीएसपी विनोद चालिया का प्रदर्शन करने वालों ने खुलकर विरोध कर दिया और उन पर आरोप लगाया कि डीएसपी ने इस मुद्दे से पहले भी दलितों के दर्जनों उत्पीड़न के मामलों को बिगाड़ा है। बौखलाई भीड़ ने मौके पर ही उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके चलते दोनों अधिकारियों को बैरंग लौटना पड़ा।
दलित उत्पीड़न क्षेत्र घोषित करे सरकार
धरने पर बसपा नेता बलराज सातरोड़िया व कृष्ण जमालपुरिया ने कहा कि हिसार जिले में दलितों के साथ जातिगत हिंसा की पुनरावर्ति हो रही है, लेकिन प्रशासन इन मामलों में गंभीर नजर नहीं आता।
सातरोडिया ने कहा कि प्रशासन खुद दलितों के मामले में जातिगत रवैया अपना रहा है। बगला गांव की घटना के 12 दिन बाद भी सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
ह्युमन राइट लॉ नेटवर्क के प्रदेश संयोजक अधिवक्ता रजत कल्सन ने कहा कि सरकार हिसार को दलित उत्पीड़न क्षेत्र घोषित करे।
हिसार में बढ़ती दलितों की जातिगत हत्याओं के मामलों में भी एफआईआर दर्ज कराने के लिए दलितों को आंदोलन करना पड़ रहा है। प्रशासन का यह रवैया संविधान विरोधी प्रतीत होता है।
गांव में भय का माहौल
धरने पर मौजूद मृतक विजय के पिता भलेराम और उनके पारिवारिक सदस्यों ने दूसरे दिन भी शव लेने से इंकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों को पूरा नहीं करता, वे शव नहीं लेगे और न ही उसका अंतिम संस्कार करेंगे।
उन्होंने कहा कि अभी भी मृतक विजय और घायल बसपा नेता हरिसिंह बगला पर हमला करने वाले आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए हैं। जब तक उन्हें पूर्ण न्याय नहीं मिलेगा, वे शव नहीं लेेंगे।
धरने पर आ सकते हैं बसपा के बड़े नेता
सामान्य अस्पताल में धरने का नेतृत्व कर रहे बसपा नेता कृष्ण जुमालपुर व बलराज सातरोडिया ने कहा कि बगला कांड पर प्रशासन की भूमिका संदिग्ध होती जा रही है।
जमालपुर ने बताया कि धरने पर बसपा के बड़े नेता भी आ सकते हैं और उसके बाद में मामले का जल्द समाधान नहीं हुआ तो प्रदेश भर में पार्टी नेताओं की सहमति से प्रदर्शन शुरू किया जा सकता है।
इस मौके पर बसपा नेता बजरंग इन्दल, सुदामा बौद्ध, प्रदीप अंबेडकर, जोगीदास, सुरेंद्र भोरिया, हंसराज नियाणा, दिलबाग डोभी, सतबीर छिंपा, जयसिंह, मायादेवी सहित भारी संख्या में महिलाएं व पुरुष समर्थक मौजूद थे।
शव का पोस्टमार्टम, गुरुवार को बन सकती है सहमति
हिसार। बगला कांड में मृतक विजय का बुधवार शाम पांच बजे चिकित्सक बोर्ड का गठन कर पोस्टमार्टम कर दिया गया। अब इस मामले में बृहस्पतिवार को पारिवारिक और अनुसूचित जाति के लोग फैसला ले सकते हैं।
मौके पर जांच अधिकारी अमित दहिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने धरनारत लोगों को समझाया और मृतक के पोस्टमार्टम के लिए अनुरोध किया।
डीएसपी ने बताया की आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी गईं और छापेमारी की जा रही है। लोगों की मांग पर गांव में भय के माहौल को देखते हुए गांव बगला में भी फोर्स तैनात कर दी है।
डीएसपी ने बताया कि हरिसिंह बगला पर हुए हमले के आरोपियों पर हत्या प्रयास और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
अपराधियों को जल्द गिरफ्तारी कर लिया जाएगा, इसके साथ ही मृतक विजय की पत्नी को सरकारी नौकरी और पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग सरकार के पास भेज दी जाएगी।
धरने पर पहुंचे बसपा प्रदेशाध्यक्ष, जताया दुख
सामान्य अस्पताल में जारी धरने के दूसरे दिन बसपा प्रदेशाध्यक्ष नरेश सारण पहुंचे और घटना पर दुख जताया। मृतक परिवार को सांत्वना देते हुए उन्होंने दुख की घड़ी में हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।