हिसार। डेयरी प्लाजा प्रोजेक्ट के लिए लगाया गया टेंडर पहली बार में सिरे नहीं चढ़ सका। अब नगर निगम प्रशासन की तरफ से दोबारा से टेंडर लगाया गया है। 41.08 करोड़ रुपये की लागत से डेयरी प्लाजा को विकसित किया जाएगा। शहर में संचालित करीब 396 पशु डेयरियों को यहां शिफ्ट किया जाएगा।
25 साल पहले पहली बार डेयरी शिफ्टिंग की घोषणा इनेलो सरकार में वर्ष 2000 में हुई थी। निगम ने इसके लिए धान्सू रोड पर जमीन ली थी। मगर प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। इसके बाद वर्ष 2004-05 में डेयरी शिफ्टिंग का मुद्दा दोबारा से उठा तो अफसरों को जमीन तलाशने की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2005 में जिला प्रशासन ने 24 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित की। साल 2010 में डेयरी शिफ्टिंग के लिए शहर में सर्वे भी हुआ था, जिसमें 292 डेयरियां संचालित मिलीं।
निगम अधिकारियों ने अगस्त 2013 में बगला रोड पर 137 एकड़ सात कनाल 14 मरले भूमि चिह्नित कर सरकार के पास प्रस्ताव भेजा। इसके बाद भी प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। 29 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट के लिए फिर घोषणा की। शहर के चारों तरफ 25-25 एकड़ जमीन पर डेयरियां शिफ्ट करने की घोषणा की गई हैं। मगर अलग-अलग जमीन नहीं मिली। आखिरकार साउथ बाईपास (बगला रोड) पर ही 50 एकड़ जमीन फाइनल हुई।
रद्द की जा चुकी है प्लॉटों की बोली
नगर निगम प्रशासन ने बगला रोड पर चयनित करीब 50 एकड़ जमीन पर डेयरी प्लाजा प्रोजेक्ट का प्रारूप बनाकर कुछ प्लॉटों की बोली भी कर दी थी। मगर इसी बीच मुख्यालय ने प्रारूप पर आपत्ति जता दी। इसके बाद निगम प्रशासन ने वर्ष 2023 में यह कहते हुए प्लाॅट की बोली को रद्द कर दिया कि बिल्डिंग कोड के अनुसार प्रोजेक्ट डिजाइन नहीं किया गया। इसके बाद इस प्रोजेक्ट की पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की गई। इसके तहत दोबारा से प्रोजेक्ट का प्रारूप तैयार कर मंजूर करवाया गया और दोबारा से प्रशासनिक मंजूरी ली गई।
डेयरी प्लाजा में 342 प्लॉट का प्रावधान
डेयरी शिफ्टिंग के नए प्रारूप में कुल 342 प्लॉट का प्रावधान है। इनमें 250 गज के 239 प्लॉट, 350 गज के 68 प्लॉट, 500 गज के 27 प्लॉट, 1000 गज के 8 प्लॉट शामिल हैं। हालांकि पुराने ले आउट प्लान में कुल 410 प्लॉट थे। इसके अलावा 1170 गज में मिल्क चिलिंग प्लांट, 5360 गज में गोबर गैस प्लांट, 3688 गज में वाटर वर्क्स का प्रावधान किया है।
यह होगा फायदा
डेयरी प्लाजा के निर्माण से शहर में चल रही पशु डेयरियों से बाहर शिफ्ट हो जाएंगी। इससे सीवर सिस्टम थोड़ा बेहतर होगा, क्योंकि डेयरी संचालक पशुओं का गोबर सीधे ही सीवर में बहा देते हैं। इससे सीवर जाम की समस्या पैदा होती है। साथ ही ये डेयरी संचालक खुले में पशुओं का गोबर डालते हैं जिससे गंदगी भी फैलती है। इसके अलावा कुछ डेयरी संचालक दूध निकालने के बाद अपने पशुओं को खुले में भी छोड़ देते हैं।
पहली बार टेंडर लगाने पर तीन एजेंसियों ने आवेदन किया था। मगर एक एजेंसी बाहर हो गई। पहली दफा टेंडर लगाने पर कम से कम तीन एजेंसियों का होना अनिवार्य होता है। इस कारण से अब दोबारा से टेंडर लगाना पड़ा।
- जयबीर डूडी, एक्सईएन, नगर निगम।