यह मेरे अब तक के खेल करियर का सबसे बड़ा टूर्नामेंट था। इस कारण से मैं थोड़े प्रेशर में खेल रही थी। सोच रही थी कि कहीं कोई पदक ही न आए। मगर फाइनल में पहुंचकर तय किया था कि स्वर्ण पदक ही जीत कर रहूंगी लेकिन सफल नहीं सकी। फिर भी इस पदक के जीतने पर भी काफी खुशी हो रही है। यह कहना है कि कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतने वाली कुश्ती खिलाड़ी ललिता सहरावत का। ललिता शनिवार को शहर पहुंची, जहां ढोल नगाड़ों के साथ उसका जोरदार स्वागत किया गया।
फाइनल मुकाबले के बारे में ललिता ने बताया कि विरोधी खिलाड़ी उससे काफी सीनियर थी। इसके अलावा उसने जो दांव लगाया, मैं समझ ही नहीं सकी। आगामी तैयारियों के बताया कि ललिता ने बताया कि वह एशियन गेम्स की तैयारियां के लिए जुट जाएंगी। इस खेलों में भी पदक जीतने के जी जान लगा देगी। 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि के लिए उसने बताया कि इसमें से कुछ पैसा वह झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले गरीब बच्चों पर खर्च करेगी। ललिता ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच कुलवंत, उषा शर्मा व अपने अभिभावकों को दिया है।
पदक जीतकर शहर लौटी ललिता का सबसे पहले साई सेंटर हिसार में स्वागत किया गया, जहां सेंटर इंचार्ज राजेंद्र बिशभनोई व स्टाफ सदस्यों ने फूल माला पहनाकर स्वागत किया। इसके बाद एचएयू के वीसी डॉ. केएस खोखर ने भी ललिता को जीत की बधाई दी। इसके बाद एचएयू के लेकर उसके जवाहर नगर स्थित आवास तक खेल प्रेमियों ने विजयी जुलूस निकाला।