हिसार। प्रदेश में कोरोना के नए वेरिएंट की दस्तक के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। इसके तहत सेक्टर 1-4 स्थित मॉलिक्यूलर लैब को नागरिक अस्पताल के मलेरिया विभाग में स्थानांतरित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य है कि अस्पताल परिसर में ही संक्रामक रोगों की त्वरित जांच और उपचार की सुविधा मिल सके। पिछले 25 दिनों से लैब को शिफ्ट करने की प्रक्रिया जारी है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से आरटीपीसीआर टेस्ट की किट के लिए जेम पोर्टल पर आवेदन किया जाएगा। इन किट्स की मदद से कोरोना संदिग्ध मरीजों के नमूने लिए जा सकेंगे। उल्लेखनीय है कि मॉलिक्यूलर लैब में कोरोना, काला पीलिया, स्वाइन फ्लू और अन्य संक्रामक बीमारियों की जांच होती है। डीजी हेल्थ के निर्देश पर यह स्थानांतरित की जा रही है। इसका लाभ यह होगा कि अब रिपोर्ट तीन दिनों में मिल सकेगी, जबकि पहले सात दिन लगते थे।
जेएन.1 वेरिएंट : कोरोना का यह वेरिएंट ओमिक्रॉन का ही सब वैरिएंट है। यह खतरनाक नहीं होता, लेकिन सावधानियां जरूरी है। इसमें जुकाम व छींके ज्यादा आती हैं और तेजी से फैलता है, लेकिन जानलेवा नहीं है।
एलएफ-7 वेरिएंट : इस वेरिएंट के बारे में स्वास्थ्य विभाग को सटीक जानकारी नहीं है। लेकिन चिकित्सकों की मानें तो ओमिक्रॉन के जेएन1 सब-वेरिएंट से विकसित रूप है। इसमें बुखार आना, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, अधिक थकान, मांसपेशियों में दर्द होता है।