डोभी में छेड़छाड़ से आहत होकर जहर निगलकर जान दे देने वाली छात्रा के परिजनों ने उसका शव 48 घंटे बाद भी नहीं लिया। परिजन घटना के बाद से ही 28 अगस्त से सामान्य अस्पताल के पार्क में धरने पर बैठे हुए हैं।
परिजनों और जन संगठनों ने मांग की है कि जब तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं होते, वे छात्रा ललिता का शव नहीं उठाएंगे। उन्होंने यह भी मांग रखी है कि आरोपियों पर छेड़छाड़ और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी जाए। पुलिस ने अभी तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि चौथे आरोपी को भी गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं।
लड़की के पिता जिले सिंह सहित धरने पर बैठे जनसंगठनों और ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल एसपी विकास धनखड़ से भी मिला। उन्होंने एसपी के सामने भी यही मांग रखी। सदर थाने में एसपी विकास धनखड़ ने उन्हें कहा कि पुलिस चौथे आरोपी को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में छेड़छाड़ अरैीी एससी एसटी एक्ट की धाराओं को भी जोड़ दिया जाएगा। बस छात्रा के परिजन उसका अंतिम संस्कार कर दें।
ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि वे जब तक सामान्य अस्पताल से धरना खत्म नहीं करेंगे, तब तक पुलिस चारों को गिरफ्तार नहीं कर लेती और धाराएं नहीं जोड़ती।
जिला पुलिस ने डोभी मामले को देखते हुए अस्पताल परिसर में पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। डोभी के ग्रमीण सुबह से लेकर दोपहर तक अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे रहे। दस लोगों का प्रतिनिधिमंडल भी एसपी से मिला, लेकिन कोई हल नहीं हो पाया।
एडवोकेट एवंज ह्यूमन राइट लॉ नेटवर्क से रजत कल्सन ने कहा कि पुलिस इनवेस्टिगेशन एजेंसी है, जो ऐसे मामलों में जज बनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने केवल एक दिन की इनवेस्टिगेशन में यह पता लगा लिया कि यह मामला प्रेम-प्रसंग का है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बिना 173 के बयान दर्ज किए और पूरी जांच से पहले मामला बदलने के चक्कर मेंप्रेस कांफ्रेंस कर डाली।