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Hisar News: लंपी के वैक्सीन की खोज ऐतिहासिक उपलब्धि, ऐसे ही ग्लैंडर्स का भी जल्दी खोजना होगा टीका

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हिसार। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसंधान सलाहकार समिति ने राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार में विकसित लंपी रोग के पहले स्वदेशी वैक्सीन लंपी प्रोवैक आईएनडी की सराहना करते हुए इस खोज को ऐतिहासिक बताया है। साथ ही ग्लैंडर्स बीमारी की रोकथाम के लिए टीके के जल्दी खोज की उम्मीद जताई है। समिति की बैठक में विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं पर चर्चा की गई। घोड़ों के स्वास्थ्य के साथ-साथ राष्ट्रीय पशु चिकित्सा प्रारूप संवर्धन केंद्र (एनसीवीटीसी) में चल रहे अनुसंधान कार्यों पर भी चर्चा हुई ।
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बता दें कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा गठित शीर्ष निकाय अनुसंधान सलाहकार समिति (आरएसी) की दो दिवसीय बैठक राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) हिसार में हुई। आरएसी के अध्यक्ष और पूर्व कुलपति व निदेशक (सेवानिवृत्त), भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली (यूपी) डॉ. एमसी शर्मा ने कहा कि लंपी बीमारी के लिए विकसित की गई वैक्सीन वर्तमान में अफ्रीका और विश्व के अन्य देशों में उपयोग में ली जा रही वैक्सीन की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावकारी है। इस वैक्सीन की मेक इन इंडिया मिशन के तहत निर्यात की भी असीम संभावनाएं हैं। डॉ. शर्मा ने कहा कि इस स्वदेशी वैक्सीन के उपयोग की जल्दी मंजूरी मिलनी चाहिए।
एनआरसीई के निदेशक डॉ. टीके भट्टाचार्य ने कहा कि इस टीके की तकनीकी को पहले ही चार कंपनियां जिनमें बायोवेट प्राइवेट लिमिटेड बंगलूरू, इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड, हैदराबाद, इंस्टीट्यूट ऑफ वेटरनरी बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स, पुणे और हेस्टर बायोसाइंसेज, अहमदाबाद को 75-75 लाख रुपये में दिया जा चुका है। बायोवेट बंगलूरू में उत्पादित परीक्षण बैच केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा परीक्षण में सही पाया गया है। वैक्सीन निर्माता कंपनी अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है।
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खनिज व विटामिन्स की कमी से होने रोगों पर भी करें अनुसंधान
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. बीएन त्रिपाठी ने कहा कि लंपी से बचाव के लिए बने टीके के सभी आवश्यक परीक्षण पूरे कर लिए गए हैं। आईसीएआर ने भारत सरकार से जल्द इस वैक्सीन के उपयोग को मंजूरी देने का आग्रह किया है। समिति के अन्य सदस्य डॉ. अशोक कुमार, डॉ. बीके जोशी, डॉ. टीवी अनिल कुमार, चित्रा तिरुनल, लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) पीआर वेंकटेश पीवीएसएम, डॉ. मोहम्मद हफीज ने भी संस्थान द्वारा किए गए अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों के साथ-साथ लंपी बीमारी के खिलाफ स्वदेशी वैक्सीन के निर्माण कार्य की सराहना की। समिति ने सिफारिश की कि वर्तमान में चल रहे शोध कार्य के अलावा पशुओं में खनिज व विटामिन्स की कमी से होने रोगों पर अनुसंधान कार्य करे। इसके अलावा समिति ने घोड़ों की घातक बीमारी ग्लैंडर्स से बचाव के लिए भी एक टीका विकसित की सलाह दी।

दो लाख से अधिक पशुओं पर हो चुका है वैक्सीन का परीक्षण
लंपी बीमारी प्रमुख रूप से मक्खी मच्छरों से फैलती है। बरसात के दिनों में इसका प्रकोप बढ़ जाता है। वर्तमान में लंपी बीमारी से बचाव के लिए केवल गोटपॉक्स वायरस के लिए बनी वैक्सीन ही अधिकृत है जो बीमारी से आंशिक सुरक्षा प्रदान करती है। इस वैक्सीन के अनुसंधानकर्ता डॉ. नवीन ने बताया कि लंपी प्रोवैक आईएनडी को देश भर में 2 लाख से अधिक जानवरों में टेस्ट किया जा चुका है। इसमें जम्मू कश्मीर में 75 हजार, राजस्थान में 65 हजार, मणिपुर में 50 हजार, यूपी में 6 हजार, पंजाब में 350, दिल्ली में 100, हरियाणा में 250 और अंडमान एवं निकोबार में 2000 खुराक शामिल है। टीकाकृत पशुओं में टीका अत्यधिक प्रभावशाली और सुरक्षित रहा है।
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