- सीएम नायब सैनी करेंगे अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का शुभारंभ, सुरक्षा, पेयजल और यातायात व्यवस्था संबंधी तैयारियां पूरी
नारनौंद। हड़प्पाकालीन सभ्यता का साक्षी राखीगढ़ी सोमवार से 25 अक्तूबर तक संस्कृति और पुरातात्विक इतिहास का मंच बनेगा। सात दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री नायब सैनी करेंगे। सीएम के दौरे के मद्देनजर प्रशासन रविवार शाम तक तैयारियों में जुटा रहा। सुरक्षा, पेयजल और यातायात व्यवस्था संबंधी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
स्टेडियम में बनाए गए हेलीपैड से मुख्यमंत्री महोत्सव स्थल पहुंचेंगे। वे कृत्रिम उत्खनन गतिविधि में भाग लेने के साथ सांस्कृतिक प्रदर्शनी व स्टॉलों का अवलोकन करेंगे। इन स्टॉलों के माध्यम से राखीगढ़ी की ऐतिहासिक विरासत, हड़प्पाकालीन जीवनशैली, पुरातात्विक महत्व और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित किया जाएगा। उपायुक्त राहुल नरवाल ने अधिकारियों के साथ आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। पेयजल, सफाई, आवागमन, यातायात और सुरक्षा सहित सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
छात्र बनेंगे बाल पुरातत्वविद
महोत्सव में कृत्रिम उत्खनन खास आकर्षण रहेगा। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में सैकड़ों विद्यार्थियों को खुदाई की प्रक्रिया से रूबरू कराया जाएगा। विद्यार्थी पुरातात्विक अवशेषों को देखकर उनके बारे में बताएंगे व पेशेवर पुरातत्वविदों की तरह मिट्टी की परतों से वस्तुओं को सावधानीपूर्वक निकालने, उनकी पहचान करने और उन्हें संरक्षित रखने की प्रक्रिया सीखेंगे। कृत्रिम उत्खनन के नोडल अधिकारी डॉ. अप्पू सहारण के नेतृत्व में आयोजन स्थल पर तीन विशेष ट्रेंच तैयार किए गए हैं। इनके भीतर हड़प्पाकालीन संस्कृति से जुड़ी वस्तुओं के मॉडल मिट्टी में दबाए गए हैं। तीसरे ट्रेंच में राखीगढ़ी से मिले मानव कंकाल की प्रतिकृति को दफनाया गया है। ट्रेंच को वास्तविक खुदाई स्थल जैसा स्वरूप देने के लिए कच्ची मिट्टी की ईंटों से करीब चार इंच ऊंची दीवार बनाई गई है। राखीगढ़ी के साइट नंबर तीन पर मिले प्राचीन कुएं का मॉडल भी तैयार किया गया है। प्रायोगिक खुदाई शुरू करने से पहले विद्यार्थियों को राखीगढ़ी की साइट एक व तीन का भ्रमण कराया जाएगा। वे पहले की खुदाई में सामने आईं दीवारों, कुओं और अन्य प्राचीन संरचनाओं को देखेंगे।
म्यूजियम के पार्क में होगी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता
नारनौंद। राखीगढ़ी के इतिहास और संस्कृति से विद्यार्थियों को रूबरू कराने के लिए म्यूजियम के पार्क में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें जींद, हांसी व हिसार जिले के सभी 14 ब्लॉक से 84 टीमें हिस्सा लेंगी। कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थी इस प्रतियोगिता में राखीगढ़ी से जुड़े सवालों के जवाब देकर अपने ज्ञान का प्रदर्शन करेंगे। नोडल अधिकारी डॉ. अजय लोहान ने बताया कि 19 से 25 अक्तूबर तक इस प्रतियोगिता का आयोजन होगा। संवाद
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राखीगढ़ी की खुदाई से निकले इतिहास को पांच मिनट की फिल्म में समेटा
- संग्रहालय में बैठकर डॉक्यूमेंट्री देखेंगे मुख्यमंत्री, डेक्कन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. वसंत शिंदे ने सरस्वती-सिंधु सभ्यता पर बनाई फिल्म
अमित रेढू
नारनौंद (हांसी)। सरस्वती-सिंधु सभ्यता में जीवन कैसा था, लोग किस तरह की बस्तियों में रहते थे और उनके अवशेष इतिहास की कौन-सी परतें खोल रहे हैं, इनका जवाब राखीगढ़ी पर तैयार डॉक्यूमेंट्री में देखने को मिलेगा। डेक्कन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति और पुरातत्वविद् डॉ. वसंत शिंदे ने यह फिल्म तैयार की है।
राखीगढ़ी महोत्सव के पहले दिन सोमवार सुबह मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी राखीगढ़ी के संग्रहालय में बैठकर इस डॉक्यूमेंट्री को देखेंगे। करीब पांच मिनट की इस फिल्म में राखीगढ़ी के पुरातात्विक क्षेत्र में खुदाई के दौरान निकले अवशेषों, मानव कंकालों और प्राचीन बस्ती के स्वरूप को दर्शाने वाले दृश्य शामिल हैं। राखीगढ़ी देश ही नहीं, भारतीय उपमहाद्वीप के प्राचीन इतिहास को समझने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है। अलग-अलग चरणों में हुई खुदाई से मिले प्रमाणों ने सरस्वती-सिंधु सभ्यता के नगर नियोजन, रहन-सहन, शिल्प और सांस्कृतिक परंपराओं को समझने के नए रास्ते खोले हैं। डॉक्यूमेंट्री में इन्हीं खोजों और पुरातात्विक कार्यों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। (संवाद)
मानव कंकालों और पुरावशेषों से समझी जा रही सभ्यता
राखीगढ़ी में मिले मानव अवशेष भी शोध का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके अध्ययन से प्राचीन आबादी के शारीरिक स्वरूप, स्वास्थ्य और दफनाने की परंपराओं जैसे विषयों को समझने में मदद मिलती है। बर्तनों, आभूषणों, मनकों और दूसरी वस्तुओं के अध्ययन से तत्कालीन शिल्पकला, तकनीक और सांस्कृतिक जीवन की जानकारी मिलती है। सात दिवसीय महोत्सव का उद्देश्य हड़प्पाकालीन सभ्यता की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाना है।