हिसार। नगर निगम के गोअभयारण्य में लंपी स्किन डिजीज फैल गई है। अब तक गोअभयारण्य में करीब 15 गोवंश में बीमारी के लक्षण मिले हैं। एहतियात के तौर पर पीड़ित पशुओं को अलग पशु बाड़े में क्वारंटीन किया गया है। साथ ही इनका उपचार किया जा रहा है। इधर गोअभयारण्य में भी यह बीमारी फैलने से नगर निगम के शहर को बेसहारा पशु मुक्त बनाने के अभियान को झटका लगा है। गोअभयारण्य का रखरखाव करने वाली संस्था ने निगम प्रशासन से फिलहाल बाहर से पशुओं को पकड़कर यहां न भिजवाने की अपील की है।
वर्तमान में गोअभयारण्य में 1100 से ज्यादा गोवंश हैं। करीब दो-चार दिन पहले ही गोअभयारण्य के कुछ पशुओं में लंपी स्किन डिजीज के शुरुआती लक्षण मिले। इन लक्षणों को देखते के साथ ही यहां तैनात कर्मचारियों ने इन पशुओं को अलग बाड़े में शिफ्ट कर दिया ताकि यह बीमारी और पशुओं न फैले। इसके बाद से अब तक करीब 15 गोवंश बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। हालांकि यहां तैनात कर्मचारियों का कहना है कि बीमारी की शुरुआत में इन लक्षणों की पहचान कर उपचार शुरू कर दिया गया है। इस कारण से इन पशुओं की हालत में पहले से काफी सुधार हुआ है। साथ ही यह दावा है कि अभी तक इस बीमारी की वजह से गोअभयारण्य में किसी पशु की मौत नहीं हुई है।
लक्षणों की पहचान के लिए चार कर्मचारी किए तैनात
गोअभयारण्य के पशुओं में इस बीमारी की पहचान के लिए चार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। किसी पशु में इस बीमारी के लक्षण नजर आने पर इन कर्मचारियों को तुरंत सूचित करना होता है ताकि उस पशु को क्वारंटीन कर उसका उपचार शुरू किया जा सके। इसके अलावा सभी पशुओं का टीकाकरण किया गया है। साथ ही मक्खी-मच्छर से बचाव के लिए फिटकरी युक्त घोल का छिड़काव किया जा रहा है।
अभी गोअभयारण्य में इस बीमारी का ज्यादा प्रकोप नहीं है। यदि गोअभयारण्य में बाहर से और पशु आते हैं और उनमें से कोई पशु बीमारी से ग्रस्त मिलता है तो यहां पहले से रखे पशुओं को खतरा हो सकता है। हमने निगम प्रशासन से कहा कि जब तक इस बीमारी पर नियंत्रण न हो जाए, तब तक यहां और पशु न भेजे जाएं। - एचसी गिरधर, मैनेजर, गोसेवा फाउंडेशन
यह है लंपी वायरस : लंपी स्किन डिजीज यानी लंपी वायरस के कारण पशुओं के शरीर में गांठें बन जाती हैं। इससे पशुओं को बुखार आता है और उनका वजन कम हो जाता है। पशुओं को सही समय पर उपचार न मिलने से उनकी मौत हो जाती है। यह वायरस मच्छरों, मक्खियों, जूं और पीसू से दूसरे पशु में जाता है।
ऐसे करें बचाव : इस वायरस की चपेट में आने पर पशुओं को आइसोलेट करने यानी दूसरे पशुओं से अलग करने की सलाह दी जाती है। हालांकि संतोष की बात यह है कि यह बीमारी पशुओं से लोगों को नहीं आती और न ही संक्रमित पशुओं का दूध पीने से किसी तरह की हानि होती है।
डोगरान मोहल्ला में बुजुर्ग को गाय ने मारी टक्कर
डोगरान मोहल्ले में बुधवार को शांति नगर निवासी 75 वर्षीय गोवर्धन दास को गाय ने टक्कर मार दी। इस हादसे में बुजुर्ग के चेहरे पर चोटें आई हैं। गोवर्धन दास अपनी दोहती के साथ बाजार से घर जा रहे थे। इस दौरान डोगरान मोहल्ला में दो गाय पीछे से भागती हुई आईं और बुजुर्ग को चपेट में ले लिया। आसपास के लोगों ने बुजुर्ग को एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां बुजुर्ग को प्राथमिक उपचार दिया गया। टक्कर लगने से बुजुर्ग का बीपी काफी बढ़ गया। चिकित्सक ने बुजुर्ग के परिजनों को उन्हें किसी अन्य अस्पताल में दाखिल करवाने की सलाह दी। उधर पार्षद अमित ग्रोवर ने चेतावनी दी है कि अगर निगम प्रशासन शनिवार तक पशु पकड़ने का अभियान शुरू नहीं करता है तो 21 अगस्त को शहरवासियों के साथ बैठक कर कोई कड़ा फैसला लिया जाएगा।
इस माह हो चुके 5 हादसे
- 2 अगस्त को सेक्टर 27-28 के पास स्कूटी सवार सेक्टर 13 निवासी सचिन बेसहारा पशु की टक्कर लगने से सड़क पर गिरकर घायल हो गया था।
- 6 अगस्त को पुष्पा कॉम्प्लेक्स के पास सांड़ की टक्कर से अर्बन एस्टेट टू निवासी मनीष देव घायल हो गए थे।
- 10 अगस्त को वार्ड 6 में सब्जी विक्रेता को गाय ने टक्कर मारकर घायल किया।
- 12 अगस्त को 12 क्वार्टर स्थित किशनदत ढाणी में 70 वर्षीय महिला चंद्रवती देवी को गाय ने टक्कर मारकर घायल कर दिया था।
- 17 अगस्त को डोगरान मोहल्ला में 75 साल के बुजुर्ग को गाय ने टक्कर मारी, चेहरे पर आईं चोटें।
निगम की गाड़ी की हुई पासिंग, माइलेज जांच के बाद शुरू होगा अभियान
नगर निगम की पशु पकड़ने के लिए आई नई गाड़ी की बुधवार को पासिंग हो गई। हालांकि अभी गाड़ी की माइलेज चेक करवाई जाएगी। उधर निगम अधिकारियों का कहना है कि अगर वीरवार को सरकारी अवकाश नहीं होता है तो यह काम इसी दिन करवा लिया जाएगा और शुक्रवार तक हर हालत में पशु पकड़ने का अभियान शुरू कर दिया जाएगा।