हांसी। जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर स्थित गांव कुलाना वीरों की भूमि के रूप में ख्यात है। 245 वर्ष पुराने इस गांव के शूरवीरों ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर विश्व युद्ध तक अपने पराक्रम का लोहा मनवाया है। इनकी वीरता व समर्पण गाथा युवाओं में राष्ट्रभक्ति और साहस की भावना का संचार करती है।
वर्तमान में गांव के तीन युवक सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर सेवा दे रहे हैं। यहां के युवा सरकारी नौकरियों में भी आगे हैं। लोगों का मुख्य पेशा खेतीबाड़ी और व्यापार है। गांव में बना मुनि महाराज मंदिर आस्था का केंद्र है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि यहां पर हांसी किले से लोग रहने आए थे। इसलिए पहले इसे किले वाला गांव कहते थे। बाद में इसे कोलाना और कुलाना कहलाने लगा है। इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि वर्ष 1780 में गुमाना राम बेरवाल व गोमद राम खुड़िया ने गांव बसाया था। 1810 तक गांव पूरा आबाद हो गया। पहले गांव में ऊंची जमीन पर लोग रहते थे। बाद में अन्य जगहों पर रहने लगे। गांव जब बसा था तब मुस्लिम परिवार भी यहां रहने लगे। बंटवारे के बाद मुस्लिम परिवार चले गए। गांव निवासी इंदराज श्योराण ने स्वतंत्रता की लड़ाई में योगदान दिया। चौधरी श्योराम ने अपने पराक्रम से प्रथम विश्व युद्ध में पदक प्राप्त किया। गांव के सुरेश कुमार सरसवां व संतलाल कालवां सेना में कैप्टन रहे हैं। बरवाला के पूर्व विधायक रामनिवास घोडे़ला मूलरूप से गांव कुलाना से हैं। गांव से दो एमबीबीएस चिकित्सक भी हैं। बलवान सिंह घोड़ेला सेवानिवृत डीआरओ, रामकिशन खुड़िया बिजली निगम में चीफ इंजीनियर रहे हैं। गांव की आबादी लगभग 4 हजार है।
कुलाना की कोमल ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
तुर्की के इस्तांबुल में 2 से 10 दिसंबर 2025 तक आयोजित एशियन ओपन पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गांव की कोमल ने नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। कोमल ने 57 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता और 211 किलोग्राम डेड लिफ्ट चैंपियनशिप में भाग लेते हुए विश्व रिकॉर्ड बनाया। वह सीटी यूनिवर्सिटी में एमबीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। पिता जेल वार्डर हैं।
गांव बसाने वाले गुमाना राम बेरवाल व गोमद राम खुड़िया के परिवार के वंशज नंबरदार बनते आए हैं। मैं गोमद राम खुड़िया के परिवार से हूं। हमारा परिवार राजस्थान के विद्यासर से आया थे। तब वह हांसी के किले पर काम करते थे। उस समय उनकी गुमाना राम से मुलाकात हुई। फिर दोनों ने मिलकर गांव बसाया था।- अमर सिंह नंबरदार
-
गांव में कई युवा सरकारी नौकरियों में भी हैं। ऐसे भी युवा हैं जो तीन-तीन नौकरियां ले चुके हैं। गांव के लोग मेहनत मजदूरी के काम के साथ व्यापार में भी आगे हैं। कई लोग अन्य शहरों में जाकर व्यापार करते हैं।- सुनील, ग्रामीण
-
गांव में पॉलिटेक्निक कॉलेज की मांग की गई थी। इसके लिए ग्राम पंचायत की तरफ से जमीन देने की भी घोषणा की गई थी। पिछले दिनों विकास रैली में विधायक ने कॉलेज की मांग रखी थी, लेकिन अब तक पूरी नहीं हुई है। - विजय, ग्रामीण
-
गांव में मुख्यमंत्री भी आ चुके हैं। वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यहां आकर लोगों की समस्याएं सुनीं थीं। उनमें से कई मांगें पूरी भी की थी।- इंद्र सिंह, सीएससी संचालक
गांव में पॉलिटेक्नीक कॉलेज बनना चाहिए। इसके लिए जमीन देने के लिए तैयार हैं। ताकि युवाओं को तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़े। जोहड़ों का सुंदरीकरण और खरड़-कुलाना रोड को चौड़ा करना चाहिए।- मेवा सिंह, पूर्व सरपंच
-
गांव के युवा सेना में कैप्टन और चिकित्सक के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। गांव में वर्ष 1985 में वर्ल्ड बैंक ने पैसा लगाकर जलघर बनाया। फिलहाल पुस्तकालय की जरूरत है। स्टेडियम में कोच नहीं है। - सम्मत राम, शिक्षक