बालसमंद। हिंदवान गांव के सेवार्थ आश्रम और गोशाला संचालक सुखदेवानंद महाराज ने रविवार दोपहर पंचायत में जहर खा लिया। इसके बाद कहा- यहीं मरकर समाधि ले लूंगा। तबीयत बिगड़ने पर मौजूद लोगों ने उन्हें हिसार के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। उन पर नौकरी लगवाने के नाम पर 34.35 लाख रुपये लेने का आरोप है। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आश्रम में संचालक का कमरा बंद मिला। इसके बाद पुलिस ने बाहर के दरवाजे को ताला जड़ चाबी कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। फिलहाल महाराज की हालत नाजुक बनी हुई है।
पुलिस को दी शिकायत में जींद के कान्हाखेड़ी निवासी दिनेश ने सुखदेवानंद महाराज पर नौकरी लगवाने के नाम पर 34.35 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। इस संबंध में आश्रम में रविवार दोपहर करीब 12 बजे पंचायत बुलाई गई थी। पंचायत में महाराज से रुपये लौटाने के लिए कहा गया तो उन्होंने इन्कार कर दिया और कहा कि ये रुपये गांव वाले देंगे। इस पर दिनेश ने कहा कि रुपये आपको दिए थे, आप ही लौटाएं। इसके बाद आश्रम संचालक ने भरी पंचायत में जहर खा लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पंचायत में आश्रम संचालक ने एक पुड़िया निकाली और काले रंग का जहरीला पदार्थ निगल लिया। पंचायत में करीब 150 लोग शामिल थे।
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नौकरी लगवाने के नाम पर लिए थे 34.35 लाख रुपये
जींद के कान्हाखेड़ी निवासी दिनेश महाराज सुखदेवानंद के आश्रम में आते थे। दिनेश से महाराज सुखदेवानंद ने 34 लाख 35 हजार रुपये लेकर नौकरी लगवाने का दावा किया था। नौकरी न मिलने के बाद दिनेश ने रुपये वापस मांगे और इस मामले में कई बार पंचायत भी हुई। इस मामले में पिछले साल अगस्त में दो-तीन बार पंचायत हुई, लेकिन उसमें कोई नतीजा नहीं निकल सका था।
पंचायत की जमीन पर बना है आश्रम
महाराज सुखदेवानंद करीब 5-6 साल से गांव में बने इस आश्रम में रह रहे हैं। पंचायत की जमीन पर यह आश्रम बना हुआ था। इससे पहले वह आर्य नगर के हिंदवान मोड़ पर रहते थे। वहां उनकी खुद की जमीन थी। यह जमीन बेचकर वे गांव हिंदवान आए थे। यहां आश्रम के साथ एक गोशाला भी है, जिसमें करीब 60 से 70 गोवंश है। आश्रम में सत्संग आदि कार्यक्रम होते हैं। महाराज खुद भी सत्संग करते हैं। उनकी गांव हिंदवान सहित आसपास के गांवों में काफी मान्यता है। इस आश्रम में वीआईपी लोगों का भी आना-जाना रहता है।
भाभी की बीमारी का इलाज करवाने के लिए आना-जाना हुआ था शुरू
जींद के कान्हाखेड़ी निवासी दिनेश ने बताया कि न्योली निवासी उसकी भाभी को अधरंग की शिकायत थी। उसी के इलाज के लिए करीब 10 साल पहले उसका भाई व भाभी महाराज के पास आते थे। धीरे-धीरे उनकी जान पहचान बढ़ती गई। इसी बीच उनका भी आश्रम में आना जाना हुआ। एक बार उनके लड़के ने महाराज से पूछा कि उसकी नौकरी लगेगी या नहीं। इस पर महाराज ने कहा कि वह उसकी नौकरी लगवा देंगे। महाराज ने आधी पेमेंट पहले और आधी बाद में देने के लिए कहा। इस पर उसने महाराज को 5-6 युवाओं को नौकरी लगवाने के लिए 34.35 लाख रुपये दे दिए, लेकिन किसी का चयन नहीं हुआ। रुपये वापस लेने के लिए वह सरपंच से मिला और रविवार को पंचायत बुलाई गई थी। पंचायत स्थल पर सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। यह पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुआ है।
आश्रम संचालक की ओर से जहर खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। - विकास, पुलिस प्रवक्ता।