हिसार। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के अफसरों में तनातनी अब खुलकर सामने आ गई है। चीफ इंजीनियर के फैसलों पर डायरेक्टर (ऑपरेशन्स) को रोक लगानी पड़ी है।
प्रबंध निदेशक के सीधे दखल और अनुमोदन के बाद डायरेक्टर ने चीफ इंजीनियर की ओर से हाल ही में किए गए तबादलों और एक्सईएन की वित्तीय शक्तियां छीनने के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। मुख्यालय से जारी इस आदेश के बाद निगम के अधिकारियों में खलबली मच गई है। इससे एक्सईएन कार्यालय से लेकर चीफ इंजीनियर कार्यालय तक चल रही आपसी खींचतान भी सामने आ गई है।
चीफ इंजीनियर हरिदत्त शर्मा ने करीब एक महीने पहले 19 अगस्त को हिसार शहर की डिविजन नंबर एक के एक्सईएन रविंद्र सिंह की वित्तीय शक्तियां छीन ली थीं। उनकी वित्तीय शक्तियां डिविजन नंबर दो के एक्सईएन विनीत कुमार को दे दी गई थीं।
बिजली इंजीनियर्स का दावा है कि डीएचबीवीएन के इतिहास में पहली बार किसी एक्सईएन की वित्तीय शक्तियां इस तरह दूसरे एक्सईएन को दी गईं। इसके बाद चीफ इंजीनियर के फैसले के संबंध में एमडी विक्रम सिंह और अन्य उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। इसके बाद ही चीफ इंजीनियर के फैसलों पर रोक लगाई गई।
हालांकि, इस मामले में कोई भी अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। सूत्रों के अनुसार आरडीएसएस योजना के तहत 20.61 करोड़ रुपये का टेंडर लगाया गया था। इसके तहत पोल, तारें, कंडक्टर्स और जंपर आदि बदलने का काम किया जाना था। टेंडर वर्ष 2024 में जारी हुआ था और मार्च 2026 तक काम पूरा किया गया। काम की पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन की टीम ने जांच की तो गुणवत्ता में खामियां मिलीं।
इसके बाद टेंडर लेने वाली एजेंसी का भुगतान रोक दिया गया। बताया जा रहा है कि इस मामले में चीफ इंजीनियर हस्तक्षेप कर एजेंसी को भुगतान जारी करवाना चाहते थे जबकि भुगतान को लेकर दोनों में टकराव हो गया था। इसके बाद एक्सईएन की वित्तीय शक्तियां दूसरे एक्सईएन को दे दी गईं।