हिसार। प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए निपुण हरियाणा मिशन के तहत शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में बदलाव किया गया है। अब प्राथमिक शिक्षकों का प्रशिक्षण छह दिवसीय होगा। इसमें विषय संबंधी समझ, शिक्षण कौशल और गतिविधियों में प्रदर्शन का आकलन भी किया जाएगा।
प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को कक्षा शिक्षण की नई तकनीकों से परिचित कराना है। उन्हें बच्चों की सीखने की जरूरत के अनुसार पढ़ाने के तरीके बताए जाएंगे। गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष जोर रहेगा। कठिन विषयों को बच्चों के लिए सरल और रुचिकर बनाने के तरीके भी सिखाए जाएंगे।
प्रशिक्षण में बच्चों की भागीदारी बढ़ाने और उनकी समझ जांचने के तरीकों पर भी चर्चा होगी। शिक्षकों को सीखने की गति और स्तर के अनुसार शिक्षण रणनीति तैयार करने का अभ्यास कराया जाएगा।
प्रत्येक बैच में 40 शिक्षक शामिल होंगे। हर ब्लॉक में चार बैच बनाए जाएंगे। प्रशिक्षण में शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। उनकी गतिविधियों और प्रदर्शन की प्रतिदिन रिपोर्टिंग होगी। अधिकारी प्रशिक्षण की प्रक्रिया की निगरानी भी करेंगे।
इस बार प्रशिक्षण में टेस्ट को खास महत्व दिया गया है। टेस्ट में प्राप्त अंक शिक्षकों के प्रमाणपत्र पर दर्ज किए जाएंगे। तीसरे दिन टेस्ट के अंक प्रमाणपत्र में दर्ज होंगे। चौथे दिन बेहतर प्रदर्शन करने वाले विजेता बैच की घोषणा होगी। छठे दिन पुरस्कार वितरण किया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को प्रशिक्षण के दौरान सम्मानित भी किया जाएगा।
निपुण हरियाणा मिशन का लक्ष्य प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान की मजबूत समझ विकसित करना है। इसी उद्देश्य से शिक्षकों को पढ़ने, लिखने और गणना संबंधी क्षमताओं को मजबूत करने वाली गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बीईओ राकेश चराया ने बताया कि प्रशिक्षण शिविर में सभी जिलों के शिक्षक शामिल होंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 30 अक्टूबर तक चलेगा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद शिक्षकों के कक्षा शिक्षण में सुधार आने की उम्मीद है। इसका सीधा लाभ विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को मिलेगा।
बुनियादी नींव होगी मजबूत
प्रशिक्षण में केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने पर जोर नहीं रहेगा। बच्चों को समझ के साथ पढ़ाने, अभ्यास कराने और उनकी प्रगति का आकलन करने की रणनीतियां सिखाई जाएंगी। बीईओ राकेश के अनुसार इससे प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थियों की बुनियादी क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को कक्षा परिस्थितियों से जुड़े अभ्यास भी कराए जाएंगे। इससे वे सीखी गई तकनीकों को आजमा सकेंगे। समूह गतिविधियों के जरिये अनुभव साझा करने और शिक्षण उपाय तलाशने का अवसर मिलेगा। अभ्यास से शिक्षण में आत्मविश्वास बढ़ेगा।