जिस शिक्षक ने ज्ञान के उजियारे से गांव में फैले अज्ञानता के अंधेरे को दूर किया। अब ग्रामीणों ने उस शिक्षक के नाम पर गांव में पुस्तकालय बनाने का फैसला किया है। उक्त शिक्षक ने अपने 85वें जन्मदिवस पर इस पुस्तकालय का शिलान्यास किया।
ग्रामीणों के अनुसार पूर्व प्रधानाचार्य एसके मित्रा 16 मई 1958 को गांव मंगाली में साइंस के अध्यापक के रूप में नियुक्त हुए। उस समय दूसरे जिलों से भी छात्र पढ़ने आते थे। वर्ष 1962 में विद्यालय की पूरी टीम को स्थानांतरित कर दिया गया। उसके बाद वर्ष 1973 में एसके मित्रा की फिर से गांव मंगाली के उच्च विद्यालय में बतौर मुख्याध्यापक नियुक्ति हुई। उनकी नियुक्ति के समय विद्यालय बुनियादी ढांचा और शैक्षणिक दृष्टि से दयनीय स्थिति में आया गया था।
खंडहरनुमा कमरे होने के कारण कक्षाएं खुली जगह में लगती थीं। उसके बाद एसके मित्रा की बच्चों की पढ़ाने की निष्ठा देख ग्रामीणों व सरपंचों द्वारा कुछ राशि जमा की गई। एसके मित्रा ने विद्यालय के समय के बाद छात्रों के साथ मिलकर निर्माण कार्य में श्रमदान करके वर्ष 1991 में विद्यालय को विज्ञान, वाणिज्य एवं कला के साथ वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बदल दिया। इसके बाद एसके मित्रा को विद्यालय के प्रथम प्रधानाचार्य के रूप में पदोन्नति किया गया। उन्हीं के प्रयासों से विद्यालय में भौतिकी, रसायन एवं वाणिज्य विज्ञान की प्रयोगशालाएं भी बनाई गई। गांव मंगाली की तीन पीढ़ियों को शिक्षित करने के बाद प्रधानाचार्य एसके मित्रा 31 मई 1995 को गांव मंगाली से सेवानिवृत्त हुए। ग्रामीणों का कहना है कि इसी स्कूल में पढ़कर कई छात्र डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, शिक्षक, अधिकारी व वकील आदि बने।
आसपास के ग्रामीण भी आए आगे
ग्रामीणों के अनुसार यह एक डिजिटल पुस्तकालय होगा। इसमें गांव मंगाली के अलावा आसपास के छात्र भी पढ़ने के लिए आ सकेंगे। ग्रामीणों की इस पहल में आसपास के गांव हरिकोट, डाया, सिंघरान, गांधीनगर एवं बाड्या ने भी योगदान के लिए आगे आए हैं। शनिवार को पूर्व प्रधानाचार्य एसके मित्रा द्वारा गुरु कृष्ण मित्रा पुस्तकालय एवं वाचनालय का शिलान्यास किया गया। इस अवसर पर एसके मित्रा एजुकेशन ट्रस्ट मंगाली एवं हौसला वेलफेयर सोसाइटी मंगाली के सभी सदस्य, डॉ. सुरेश कुमार बधानिया एवं गांव के सरपंचों के अलावा गांव के गण्यमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।