हिसार। समाज में बेटियों को बेटों की बराबरी का दर्जा मिल सके, इसके लिए बेटियों को शिक्षित होना जरूरी है। उन्हें पढ़ाई करके स्वयं समाज में अपना स्थान बनाना होगा। इस मसले में समाज और सरकार कुछ नहीं कर सकती। हां, हमारे समाज और अभिभावकों को नैतिकता सीखाने की जरूरत है। गंदी मानसिकता के साथ लोग लड़कियों या महिलाओं को केवल उपभोग की वस्तु समझने लगे हैं। ऐसी विकृत मानसिकता को दूर करके महिलाओं को गरिमा के साथ जीने का अधिकार रखने वाली एक इंसान के तौर पर देखना होगा। प्रदेश में बालिकाओं से लगातार बढ़ रहे शोषण के मामलों को कम करने के लिए सरकार को भी गंभीरता दिखाने की जरूरत है। सबसे जरूरी है कि बच्चों को भी कानून की जानकारी हो। ये सब बातें प्रदेश की विभिन्न प्रबुद्ध महिलाओं ने कहीं। ये महिलाएं अमर उजाला द्वारा 'कैसे बढ़ें बेटियां' विषय पर आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रहीं थीं।
बेटियों के प्रति मानसिकता बदलनी होगी
समाज के लोगों को बेटियों के प्रति अपनी मानसिकता को बदलना होगा। उन्हें समझना होगा कि बेटियां भी बेटों के बराबर हैं। उन्हें भी बेटों के बराबर का हक दिए जाने की जरूरत है। अभिभावक बेटियों को बाहर निकालने से डर रहे हैं। न वे स्कूल में सुरक्षित हैं और न ही घर में। इसके लिए जरूरी है कि समाज अपने बेटों को भी नैतिकता का पाठ पढ़ाए। बेटियों को भी पढ़ना जरूरी है कि ताकि वे स्वयं घरेलू हिंसा जैसी प्रताड़ना के खिलाफ लड़ सकें। आज के समय में नारी को अबला नहीं समझा जाना चाहिए। वह किसी भी तरह की चुनौतियों से पार पाने में सक्षम है और उन्होंने ये साबित भी किया है।
- डॉ. प्रोमिला सुहाग, निदेशक, वैश्य कॉलेज, भिवानी।
बेटियों व महिलाओं को स्वावलंबी बनने की जरूरत
जब तक बेटियां पढ़ाई नहीं करेंगी, तब तक औरतों का शोषण होता रहेगा। बेटियों व महिलाओं को आज स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है। जब तक पुरुषों पर निर्भर रहेंगी, तब तक वे शोषण का शिकार होती रहेंगी। समाज को ठीक करना है तो इसके लिए बेटियों की शिक्षा जरूरी है। सरकार ऐसा नहीं कर सकती। सरकार केवल बेटियों की पढ़ाई सुनिश्चित करे। बेटियां पढ़ाई करके ही समाज में अपनी जगह बना सकती हैं। वे पढ़ाई करके आत्मनिर्भर बनेंगी तो उन्हें रोटी-कपड़े का डर नहीं रहेगा और वे घरेलू हिंसा या अन्य गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठा सकेंगी।
- डॉ. अनीता बंसल, महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, हिसार।
विकृत मानसिकता के कारण हो रहा शोषण
बेटियों को बचाना और उन्हें आगे बढ़ाना, आज भी एक बहुत बड़ी सामाजिक चुनौती है। समाज की विकृत मानसिकता के कारण हजारों नाबालिग बेटियां भी यौन शोषण का शिकार होती हैं। ये बहुत गंभीर विषय है। ऐसे में समाज में जागरूकता की जरूरत है। दूसरा, कानूनी प्रक्रिया के सरलीकरण की आवश्यकता है, ताकि हर कोई कानून को समझ सके। इसके लिए सरकार और आयोग ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन फिर भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। हमने हाल ही में प्रदेश के 4200 स्कूलों में महिला शिक्षकों की नियुक्ति करने की भी सिफारिश सरकार को भेजी है, ताकि छात्राएं खुलकर बात कर सकें। यहां कोई महिला शिक्षिका नहीं थीं।
- ज्योति बैंदा, चेयरपर्सन, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, हरियाणा।
आत्म निर्भर बनें बेटियां
बेटियों के प्रति जघन्य अपराधों की सूचनाएं मिलती हैं तो मन में ज्वाला भभक उठती हैं। समाज को महिलाओं और बेटियों के साथ दोहरा रवैया अपनाने से बाज आना होगा। दूसरा, यह भी जरूरी है कि बेटियां आत्मनिर्भर बनें। अगर वे आत्मनिर्भर बनती हैं तो शोषण करने वालों को भी समझ में आ जाएगा कि उसे तुम्हारी बैसाखियों की जरूरत नहीं है। सरकार बेटियों को मानसिक और शारीरिक रूप से भी मजबूत बनाने का काम करे। लड़कियों को सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिया जाना आज की जरूरत है।
- डॉ. अनीता भारद्वाज, प्राध्यापिका, राजकीय विद्यालय, सांजरनवास, चरखी दादरी।
डॉ. अनिता बंसल।- फोटो : Hisar
अनिता भारद्धवाज ।- फोटो : CharkhiDadri
डा. प्रोमिला सुहाग।- फोटो : Bhiwani