हिसार। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दो महीने की जांच के बाद सात दिव्यांग प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी मिली है। कुछ में प्रतिशत, मुहर और चिकित्सकों के हस्ताक्षर से छेड़छाड़ की गई है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जांच रिपोर्ट अब पुलिस अधीक्षक लोकेंद्र सिंह को कार्रवाई के लिए सौंपी गई है। दिव्यांग प्रणाम पत्रों में छेड़छाड़ करने वालों पर अब एफआईआर दर्ज होगी। पुलिस जांच में कई बड़े खुलासे होने की आशंका जताई जा रही हैं। गौरतलब है नागरिक अस्पताल में जून माह में दिव्यांग प्रमाण पत्रों में फर्जीवाड़ा सामने आया था।
दोबारा मेडिकल करवाने 7 में से 5 आए
सिविल सर्जन डॉ. रत्ना भारती ने बताया कि जून माह में मामला सामने आने के बाद जांच कमेटी गठित की थी। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी उसमें सात प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी मिली। कमेटी द्वारा गड़बड़ी करने वालों पर एफआईआर दर्ज करवाने की सिफारिश की थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोबारा से सातों को रि मेडिकल के लिए भी बुलाया गया, लेकिन सात में से पांच दोबारा मेडिकल करवाने आए। इन पांचों फार्मों में प्रतिशत, मुहर और हस्ताक्षर से छेड़छाड़ मिली। मेडिकल कॉलेज अग्रोहा के चिकित्सकों ने भी जांच की। दो बार जांच होने के बाद अब दिव्यांग प्रमाण पत्रों पर लगी मुहर, प्रतिशत और चिकित्सक के हस्ताक्षर करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के लिए पुलिस अधीक्षक लोकेंद्र सिंह को अपनी रिपोर्ट और शिकायत सौंप दी है।
हो सकते हैं कई बड़े खुलासे
पुलिस की जांच में कई बड़े खुलासे होने के कयास लगाए जा रहे हैं। फर्जी मुहर कहां से बनवाई और किसने कहने पर, हस्ताक्षर किसने किए और प्रमाण पत्रों पर प्रतिशत कम या ज्यादा किसके कहने पर किया। गड़बड़ी करने वालों मे कौन-कौन शामिल हैं ये पुलिस की जांच में सामने आएगा।
यह था मामला
जून माह में दिव्यांग प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। प्रमाण पत्र बनवाने में चिकित्सकों की फर्जी मुहर और हस्ताक्षर किए गए है। जांच में सामने आया था कि एक प्रमाण पत्र पर मेडिकल कॉलेज अग्रोहा के ईएनटी विभाग की मुहर और हस्ताक्षर भी नकली मिले थे। नेत्र, हड्डी और ईएनटी के चिकित्सकों की फर्जी मुहर और हस्ताक्षर मिले थे। जांच में सामने आया था कि नकली और असली मुहर में काफी अंतर है। जबकि चिकित्सकों के हस्ताक्षर भी मेल नहीं खा रहे। चार चिकित्सकों की टीम ने जांच के बाद रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी थी।
सात दिव्यांग प्रमाण पत्रों में छेड़छाड़ मिली है। किसी में प्रतिशत कम या ज्यादा है। किसी में मुहर और किसी में हस्ताक्षर में गड़बड़ी मिली है। दो बार की जांच और लिगल रिपोर्ट के साथ एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट सौंपी है।
- डॉ. रत्ना भारती, सीएमओ, नागरिक अस्पताल, हिसार