सूर्य नगर रेलवे फाटक पर आरओबी के लिए पीडब्ल्यूडी ने फिजिबिलिटी सर्वे, जनरल ड्राइंग अरेंजमेंट, सॉयल इंवेस्टिगेशन तथा डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने के पंचकूला की कंपनी को यह काम सौंपा है। कंपनी को एक महीने में काम करना होगा। इसके लिए कंपनी को 16 लाख 38 हजार का भुगतान किया जाएगा।
सूर्य नगर के पास रेवाड़ी, बठिंडा लाइन पर फाटक नंबर 60, हिसार-जाखल रेल लाइन पर फाटक नंबर 89 पर आरओबी के लिए पीडब्ल्यूडी ने कंस्लटिंग इंजीनियरिंग एसोसिएट को काम सौंपा है। पंचकूला की इस कंपनी को 16.38 लाख 38 रुपये का टेंडर वर्क ऑर्डर जारी किया है, जिसमें कंपनी दोनों फाटक पर मिट्टी के सैंपलिंग कर इसकी जांच करेगी। इस जांच में यह बताया जाएगा कि आरओबी का वजन सहने के लिए मिट्टी में क्षमता है या नहीं। इंजीनियरिंग कंपनी रेलवे ओवर ब्रिज को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसमें बताया जाएगा कि आरओबी पर कितना खर्च आएगा। इसके लिए कितनी जमीन की जरूरत होगी। आरओबी की लंबाई, ऊंचाई, चौड़ाई कितनी होगी। आरओबी के लिए कितने साइज के पिलर बनाए जाएंगे। यह कंपनी जनरल एरेंजमेंट ड्राइंग भी तैयार करेगी। कंपनी पूरी स्टडी करके इसकी रिपोर्ट एक माह में विभाग को सौंपेगी।
कंपनी ने प्रतिनिधि ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि टेंडर मिलने के बाद उन्होंने बैंक गारंटी के तौर पर पैसा जमा करा दिया है। हमने साइट का मुआयना पहले ही किया हुआ है। दो से तीन दिन में कंपनी की इंजीनियरिंग टीम मौके पर पहुंच जाएगी। सबसे पहले सॉयल टेस्टिंग होगी। इसके बाद जीएडी व डीपीआर पर काम करेंगे। हम पूरा प्रयास करेंगे कि तय समय पर रिपोर्ट तैयार कर सकें।
चार महीने पहले इंजीनियरिंग चीफ ने दी थी सहमति
करीब चार महीने पहले सीपीएस डॉ. कमल गुप्ता ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरिंग- इन-चीफ के साथ शहर की सभी प्रमुख रेल फाटकों का मुआयना किया था। इंजीनियरिंग - इन- चीफ ने सभी फाटक पर आरओबी के लिए सहमति जाहिर की थी।
साउथ बाईपास के तीन फाटकों पर भी आरओबी
करीब 22 किलोमीटर लंबे साउथ बाईपास पर स्थित तीन रेलवे फाटक पर भी आरओबी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें सातरोड, सेक्टर 16-17 तथा घोड़ा फार्म के पास स्थित रेलवे फाटक शामिल हैं। सेक्टर 16-17 फाटक पर आरओबी के लिए लंबे समय पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।
सूर्य नगर, सेक्टर 1-4 की दोनों रेलवे फाटक के लिए आरओबी प्रस्तावित किया गया है। सूर्य नगर के लोगों को अंडर पास देने पर भी रिपोर्ट मांगी गई है। कंपनी की ओर से इस बारे में एक महीने में रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अन्य फाटक पर भी आरओबी के लिए जल्द टेंडर होंगे।
- डॉ. कमल गुप्ता, सीपीएस, हरियाणा
एक महीने में यह काम करेगी कंपनी
कंपनी की ओर से फिजिबिलिटी स्टडी रिपोर्ट बनाई जाएगी, जिसमें जीओ टेक्निकल इंवेस्टिगेशन में मिट्टी की जांच होगी। इसके बाद कंपनी बिल ऑफ क्वांटिटी बनाएगी, जिसमें यह पता लगेगा कि आरओबी- आरयूबी के लिए कितनी सामग्री की जरूरत होगी। वर्किंग ड्राइंग, डिटेल ड्राइंग भी कंपनी की ओर से बनाई जाएगी। कंपनी मौके का मुआयना कर यह भी बताएगी कि आरओबी आरयूबी के लिए कितनी जमीन की जरूरत होगी और इसके लिए कितनी जमीन उपलब्ध है।