हिसार। पढ़ाई के दौरान माता-पिता ने सूरज को खेलने से मना किया तो वह जिद पर अड़ गया और खेल में ही अपना करियर बनाने की ठान ली। आज सूरज देश में साई के सबसे कम उम्र के कोच हैं।
25 वर्षीय सूरज हिसार जिले के गांव साबरवास के रहने वाले हैं और फिलहाल भिवानी साई में एथलेटिक कोच के पद पर कार्यरत हैं। सूरज बताते हैं कि वह पढ़ाई में काफी होशियार था। ऐसे में उनके माता-पिता हमेशा कहते थे कि बेटा खेल में कुछ नहीं रखा है। तेरा पढ़ाई में दिमाग चलता है, इसलिए मन लगाकर पढ़ाई कर ले। यह बात सूरज को बिलकुल भी रास नहीं आई और उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ एथलेटिक में अपना कदम रख लिया। सूरज खुद भी इंटरनेशनल गोल्ड मेडलिस्ट है। वह उड़ीसा और दिल्ली में भी कोच रह चुके हैं। हाल ही में उनका तबादला भिवानी साई में हुआ है। सूरज के पिता जयप्रकाश बीएसएफ से सेवानिवृत्त हैं, वहीं माता सुमित्रा गृहिणी हैं।
एचएयू से की थी बीएसएसी, तभी बना लिया खेलने का मन
सूरज पढ़ाई में काफी होशियार रहे। 10वीं कक्षा में उन्होंने 95 प्रतिशत तो 12वीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। उसके बाद उन्होंने एचएयू हिसार से बीएससी की पढ़ाई की। इस दौरान स्पोर्ट्स का विषय पढ़ते थे। शुरू में सूरज ने एचएयू में कोच निर्मल सिंह भुल्लर के पास कबड्डी खेलना शुरू किया। कुछ दिन बाद सूरज की स्पीड को देखते हुए कोच निर्मल सिंह भुल्लर ने उनको एथलेटिक कोच ओमप्रकाश भादू के पास प्रशिक्षण लेने के लिए भेज दिया।
20 नेशनल मेडलिस्ट खिलाड़ी कर चुके तैयार
सूरज साढ़े 22 साल की उम्र में ही कोच लग गए थे। अब तक 20 नेशनल मेडलिस्ट खिलाड़ी तैयार कर चुके हैं। उन्होंने पांच इंटरनेशनल खिलाड़ी भी तैयार किए हैं। उन खिलाड़ियों का इंटरनेशनल प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन रहा है। सूरज का कहना है कि उनका सपना ज्यादा से ज्यादा इंटरनेशनल खिलाड़ी तैयार करना रहेगा। (संवाद)