बात 2004 की है। गांव मंगाली के गर्ल्स स्कूल में ना स्पोर्ट्स टीचर था और ना कोई ग्राउंड। ऐसे में गांव में लड़कियों के खेलने के बारे में सोचना भी मुश्किल था। तभी सुखविंद्र कौर स्कूल में डीपी के तौर पर प्रमोट होकर आई तो गांव की किस्मत चमक गई। उन्होंने सबसे पहले लड़कियों के लिए ग्राउंड तैयार करवाने की सोची। स्कूल की खाली पड़ी जमीन पर उगी बड़ी- बड़ी झाड़ियों को हटवाने और ग्राउंड तैयार करवाने के लिए उन्होंने ग्रामीणों से सहयोग मांगा। कड़ी मशक्कत के बाद गांव मंगाली के पांचों सरपंचों के साथ मिलकर उन्होंने ग्राउंड तैयार करवाया। ग्राउंड की सफाई के बाद पानी डाला गया तो पुराने जमाने का कब्रिस्तान उभर आया। सुखविंद्र कौर ने हार नहीं मानी। ग्रामीणों और सरपंचों के सहयोग से करीब 250 ट्राली मिट्टी डलवा कर ग्राउंड भरा गया।
शुरुआत में 10 लड़कियां आई, आज 150 ले रही प्रशिक्षण
शुरुआत में करीब 10 लड़कियां ही आईं। सुखविंद्र कौर घर-घर जाकर लोगों से मिली और समझाया तो करीब 25-30 लड़कियां हो गई थी। प्रतियोगिता के लिए लड़कियों का सिलेक्शन हुआ तो परिवार वालों ने बाहर भेजने से मना कर दिया। जैसे-तैसे परिवार वालों को समझाया और लड़कियां गांव से बाहर निकलीं। जिला स्तर से राज्य स्तर पर पदक और स्कॉलरशिप मिलनी शुरू हुई तो लोगों में उत्साह जगा। उन्होंने अब स्वयं अपनी बेटियों को खेल के मैदान में भेजना शुरू कर दिया। आज ग्राउंड में करीब 150 लड़कियां फुटबॉल का प्रशिक्षण लेने आती हैं। रविवार को भी उनकी एक शिष्या रेणू भारतीय फुटबाल टीम की ओर से खेलने हांगकांग गई हुई है। शुक्रवार को मलयेशिया के साथ हुए गेम में रेणू ने दो गोल दागे थे। इससे पहले भी कई लड़कियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं। पिछले दिनों हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हरियाणा की गर्ल्स फुटबाल टीम में आधी लड़कियां मंगाली की थीं।
तो छोटा पड़ गया ग्राउंड
लड़कियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताएं जीती तो यहां एक तरह का सकारात्मक संकट खड़ा हो गया। गर्ल्स स्कूल का बहुत बड़ा ग्राउंड लड़कियों की बढ़ती संख्या के चलते छोटा पड़ गया। डीपी सुखविंद्र कौर के सहयोगी एवं एक निजी स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर नरेंद्र कुमार बताते हैं कि सुखविंद्र कौर के आने से गांव में एक नई तरह की क्रांति शुरू हो गई। जिस स्कूल का ग्राउंड है, वह स्कूल छठी कक्षा से शुरू होता है। लेकिन अन्य स्कूलों में पढ़ने वाली पहली और दूसरी कक्षाओं की लड़कियां भी ग्राउंड में पहुंचने लगी। मना करने के बावजूद छोटी बच्चियां यहीं पर फुटबाल खेलने की जिद करती हैं। हालात ये हुए कि 150 से अधिक लड़कियां प्रशिक्षण लेने के लिए पहुंचने लगी। इस बार ग्रामीणों ने खुद सहयोग किया। दो नए छोटे ग्राउंड तैयार किये। अब तीन ग्राउंड हो गए। सभी खिलाड़ी एक साथ प्रेक्टिस करते हैं।
मूलत : पंजाब की, हिसार बना कर्मस्थली
सुखविंद्र कौर ने बताया कि वे मूल रूप से पंजाब के जालंधर से हैं लेकिन बचपन से ही एफसी कॉलेज में प्रोफसर रही अपनी बहन के पास हिसार में रह रही हैं। उन्होंने बीए हिसार से ही किया। इसके बाद एनआईएस पटियाला से फुटबाल में डिप्लोमा किया। वे हरियाणा की पहली ऐसी महिला हैं जिन्होंने फुटबॉल में डिप्लोमा किया था। 2004 से पहले वे फतेहाबाद जिले में कार्यरत थी। इसके बाद वे प्रमोट होकर मंगाली पहुंची।