फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

थ्योरी पढ़ने की बजाय लैब में अधिक प्रयोग करेंगे विद्यार्थी

विज्ञापन
विज्ञापन
गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय का बायो ऐंड नैनो टेक्नोलॉजी विभाग नई शिक्षा नीति के तहत इसी सत्र से एलओसीएफ-लर्निंग आउटकम आधारित शिक्षा पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। एमएससी बायोटेक्नोलॉजी के विद्यार्थी अब थ्योरी कम पढ़ेंगे और लैब में अधिक प्रयोग करेंगे। बता दें कि गुजवि जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाला प्रदेश का एकमात्र विश्वविद्यालय है।
विज्ञापन

इस पाठ्यक्रम को डिफेंस रिसर्च, एलुमनाई, अनुभवी शिक्षकों व औद्योगिक विशेषज्ञों सहित विभिन्न क्षेत्रों के वैज्ञानिकों की सलाह के बाद बनाया गया है। इससे विद्यार्थी एंटरप्रेन्योरशिप की तरफ जाएंगे और नौकरी लेने वालों की बजाय नौकरी देने वाले बनेंगे।
विभाग द्वारा एमएससी बायोटेक्नोलॉजी, एमएससी माइक्रोबायोलॉजी, बीएससी-एमएमसी बायोटेक्नोलॉजी ड्यूल डिग्री व एमटेक नैनो टेक्नोलॉजी के पाठ्यक्रमों को आधुनिक रूप दिया गया है। विभाग द्वारा तैयार किए गए पाठ्यक्रम को पोस्ट ग्रेजुएट बोर्ड ऑफ स्टडीज ऐंड रिसर्च (पीजीबीओएस ऐंडआर) ने भी मंजूरी दे दी है।
विज्ञापन

क्या होगा फायदा
बायो ऐंड नैनो टेक्नोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. विनोद छोकर ने बताया कि नई शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय मान्यता और प्रत्यायन परिषद, अन्य राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मान्यता एजेंसियों की आवश्यकतानुसार बदलना बहुत आवश्यक है। नए पाठ्यक्रम में पूर्ण पाठ्यक्रम का उद्देश्य दर्शाया जाएगा। विद्यार्थी पढ़ाई शुरू करने से पहले ही जान सकेंगे कि वे क्या पढ़ेंगे, क्या सीखेंगे और इससे उनको क्या फायदा होगा।
पारदर्शिता आएगी
प्रो. विनोद छोकर ने बताया कि नए पाठ्यक्रम के लागू करने से विद्यार्थियों की परीक्षा से संबंधित समस्याएं भी दूर होंगी व परिणामों में और अधिक पारदर्शिता आएगी। इसके तहत शिक्षक भी विद्यार्थियों के परिणामों का विश्लेषण करेंगे और विद्यार्थियों द्वारा जिस क्षेत्र में प्रतिभा दिखाई जाएगी उन क्षेत्रों को और अधिक मजबूती प्रदान करेंगे।
भारत सरकार वहन करेगी एमएससी संचालन का खर्च
विभाग के एमएससी बायोटेक्नोलॉजी कार्यक्रम को केंद्र सरकार के अधीन जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), नई दिल्ली से स्वीकृति मिल गई है। साथ ही जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई है।
भारतीय ज्ञान प्रणाली भी शामिल
पाठ्यक्रम को डिजिटल सेल्फ लर्निंग, डिजिटल एडेड लर्निंग, डिजिटल और क्लासरूम लर्निंग और क्लासरूम ऐंड लैब लर्निंग के संदर्भ में विषयों को शामिल करके डिजाइन किया गया है। इसमें मौजूदा ज्ञान प्रणाली के साथ भारतीय ज्ञान प्रणाली का समावेश भी होगा।
नई शिक्षा नीति में प्रैक्टिकल लर्निंग पर अधिक जोर दिया गया है। हम भी इसी दिशा में प्रयासरत हैं। नई शिक्षा नीति लागू नहीं हुई, लेकिन हमने सिलेबस उस तरीके से डेवलप किया है। लैब में होने वाली गतिविधियों से विद्यार्थी अधिक सीख पाएंगे। वे रचनात्मक होंगे तो इनोवेशन भी कर पाएंगे।
विज्ञापन

- प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, गुजवि
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें