हिसार। छोटी-छोटी दस्तावेजी गलतियां लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन रही हैं। नगर निगम कार्यालय में नाम, सरनेम या अन्य विवरण की मामूली त्रुटियों के कारण आवेदकों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई मामलों में पूरे कागजात होने के बावजूद नागरिकों को छह-छह बार कार्यालय आना पड़ा। सोमवार सुबह अमर उजाला टीम ने निगम कार्यालय पहुंचकर पड़ताल की तो कई लोग अपने काम के लिए भटकते मिले।
सुबह करीब 9:30 बजे नागरिक सुविधा केंद्र और हाउस टैक्स विभाग में कर्मचारी अपने काउंटर पर मौजूद मिले और भीड़ भी कम थी, लेकिन सबसे ज्यादा भीड़ मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने वालों की थी। नाम या विवरण में छोटी गड़बड़ी के कारण आवेदकों को बार-बार लौटाया जा रहा था। किसी के शैक्षणिक दस्तावेज में मां के नाम के साथ देवी जुड़ा था तो आधार कार्ड में नहीं, वहीं किसी के कागजों में सरनेम अलग-अलग था। जिनके दस्तावेज पूरे और सही पाए गए, उन्हें उसी दिन प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया, जबकि त्रुटि वाले मामलों में आवेदकों को संशोधन कर दोबारा आने को कहा गया।
नियमों के अनुसार सभी दस्तावेजों में नाम, जन्मतिथि व अन्य विवरण की एकरूपता जरूरी होती है। नागरिकों का कहना है कि छोटी गलती सुधारने के लिए पहले अन्य विभागों में दस्तावेज ठीक करवाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों खर्च होते हैं। हालांकि कार्यालय की व्यवस्था संतोषजनक दिखी और कर्मचारी लोगों का मार्गदर्शन करते नजर आए, ताकि अगली बार दस्तावेजों में कमी न रहे। कुल मिलाकर सुबह के समय कामकाज सुचारू रहा, लेकिन दस्तावेजी त्रुटियां अभी भी लोगों की परेशानी बनी हुई हैं।
केस एक
मैं हिसार के महावीर कालोनी का रहने वाला हूं। मेरी बेटी का सभी कागजात पूरे हैं। उसके बाद भी उसका मैरिज सर्टिफिकेट रिजेक्ट हो रहा है। आज छठी बार यहां आया हूं, अब मुझे फिर से तारीख दी गई है और कहा गया है कि अपने दामाद के साथ आना है।
- सुरेश कुमार।
केस दो
मैं हिसार की रहने वाली हूं। अपने भाई के साथ निगम में दफ्तर में आई हूं, मेरा मैरिज सर्टिफिकेट बनना है। मेरे एजुकेशन सर्टिफिकेट में मेरी मां के नाम के सामने देवी लिखा है, जबकि मेरी मां के आधार कार्ड में देवी नहीं है। इसकी वजह से मेरा मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहा है। अब मुझे मेरी मां के आधार कार्ड में नाम बदलवाना पड़ेगा। इसके बाद ही मेरा सर्टिफिकेट बन पाएगा।
- रीना।
केस तीन
मैं महाबीर कालोनी से आई हूं। मैंने अपना मकान दो साल पहले बेच दिया था। जिस व्यक्ति को मकान बेचा था, उनके घर पर मेरे नाम से हाउस टैक्स जा रहा है। इसके चलते मैं यहां आई हूं और एप्लिकेशन लिखकर दूंगी तो मेरे नाम से हाउस टैक्स जाना बंद होना जाएगा।
- सीमा।
केस चार
नगर निगम की ओर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसकी वजह से मेरी दुकान से कपड़े नगर निमग की ओर से जब्त किए गए हैं। मैं उन्हें ही लेने के लिए आया हूं, मैंने फीस जमा कर दी है। आज मिलेंगे या नहीं इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
- संदीप।