हिसार। सरकार द्वारा हर बच्चे को शिक्षा की धारा से जोड़ने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चलाई जाती है, जिनमें से एक यह योजना है कि अनुसूचित जाति के विद्यार्थी चाहे लड़का हो या फिर लड़की, उन्हें शिक्षा विभाग की ओर से साइकिलें उपलब्ध करवानी थी। ताकि जिस गांव में मिडल व हाई स्कूल न हो या फिर गांव से दो किलोमीटर या इससे अधिक दूरी पर कोई अन्य स्कूल हो तो साइकिल के जरिए वह स्कूल में जाकर पढ़ाई जारी रख सकें। लेकिन शिक्षा विभाग ने ऐसा कारनामा किया है कि उन्होंने शिक्षा की धारा से जुड़ने वाले ऐसे विद्यार्थियों की आस तक तोड़़ दी है। मामला है कि मुख्यालय ने हिसार जिले के सरकारी स्कूलों में छठी कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए साइकिलें उपलब्ध करवाने के लिए 2 लाख का बजट जारी किया था। हैरानी की बात है कि शिक्षा विभाग ने इन विद्यार्थियों को साइकिलें उपलब्ध करवाने की बजाय दो लाख के बजट को ही वापिस लौटा दिया। जबकि आज भी विद्यार्थी साइकिलें लेने की चाह में मन में अपने सपने संजोए हुए है।
एक साल पहले बजट हुआ था जारी
बीते साल शिक्षा विभाग की ओर से जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छठी कक्षा के अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए 2 लाख का बजट जारी किया था ताकि इन विद्यार्थियों को साइकिलें उपलब्ध करवाई जा सकें। लेकिन अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से न लेने के कारण विद्यार्थियों को साइकिलें उपलब्ध नहीं करवाई जा सकें, जिसका खामियाजा आज भी विद्यार्थी भुगत रहे हैं।
20 व 22 इंची की मिलनी थी साइकिलें
शिक्षा विभाग की ओर से 20 व 22 इंची की साइकिलें विद्यार्थियों को उपलब्ध करवानी थी, जिसमें 20 इंची साइकिल का मूल्य 2800 रुपये जीएसटी व अन्य टैक्स सहित था, जबकि 22 इंची साइकिल की कीमत 3 हजार रुपये तय की गई थी। अगर मेले में विद्यार्थी को तय कीमत से अधिक मूल्य की साइकिल पसंद आती है अतिरिक्त रुपये अभिभावकों की ओर से भुगतान करने होते हैं।
जिला स्तर पर इनकी थी जिम्मेदारी
विद्यार्थियों को साइकिलें उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी जिला स्तर की कमेटी की है। क्योंकि कमेटी के अध्यक्ष डीईईओ, सदस्य सचिव खंड शिक्षा अधिकारी जबकि सदस्य के रूप में आयोजक विद्यालय का प्राचार्य, डीएसएस-डीएमस या एईओ और लाभार्थी विद्यालयों के स्कूल मुखिया की है।
मामला मेरे संज्ञान में है। अधिकारियों से फीडबैक लेकर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- निर्मल दहिया, डीईईओ, हिसार।