अग्रोहा। खेलों को बढ़ावा देने के लिए गांवों में खेल नर्सरियां शुरू की गईं। नर्सरियों में प्रशिक्षण लेकर खिलाड़ियों ने राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीते। मगर आज भी नर्सरियों में खिलाड़ियों को जमीनी स्तर पर सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। श्यामसुख के राजकीय उच्च विद्यालय में चल रही कुश्ती की नर्सरी में खिलाड़ियों के लिए पीने का पानी और शौचालय की सुविधा नहीं है। खिलाड़ी पीने का पानी घर से लाने को मजबूर है।
कुश्ती हॉल छोटा होने के कारण खिलाड़ियों को अभ्यास करने में परेशानी आ रही है। खिलाड़ियों ने खुद पैसे एकत्रित कर जिम का सामान खरीदा है। स्टोर रूम की हालत खराब है। वहीं, खिलाड़ियों को डेढ़ साल से डाइट राशि मिलने का इंतजार चल रहा है। डाइट राशि को लेकर खिलाड़ी कई बार खेल अधिकारियों के समक्ष गुहार लगा चुके हैं।
खिलाड़ियों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वे खुद डाइट का खर्चा उठा सकें। खास बात है कि खिलाड़ियों की उपलब्धियों को देखते हुए खेल विभाग ने दूसरी बार नर्सरी दी है। नर्सरी में 50 खिलाड़ी अभ्यास करने आते हैं। नर्सरी के तहत प्रशिक्षण लेकर अमन नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक जीत चुका हैं। वहीं मोहित ने स्टेट चैंपियनशिप में बेहतर प्रदर्शन किया था।
एक बार खेल विभाग के अधिकारी नर्सरी में आकर देखे तो उन्हें पता चलेगा कि यहां क्या सुविधाएं मिल रही हैं। पीने का पानी तक नहीं है। जब नर्सरी में सुविधाएं ही नहीं तो खोलने का क्या फायदा है।
- हेम, खिलाड़ी।
नर्सरी खोलने से पहले खेल विभाग के अधिकारियों के किए दावे फेल हो रहे हैं। शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। मैं नेशनल स्तर पर रजत पदक जीत चुका हूं।
- अमन, खिलाड़ी।
एक खिलाड़ी को डाइट लेना बहुत जरूरी है। मगर यहां तो डेढ़ साल से डाइट राशि तक नहीं मिली है। डाइट नहीं लेंगे तो प्रदर्शन पर भी असर पड़ेगा। हर माह खाते में राशि आनी चाहिए, ताकि खिलाड़ी डाइट ले सकें।
- विकास, खिलाड़ी।
नर्सरी में चेंजिंग रूम तक नहीं बना हुआ है। पीने का पानी भी घर से लाते हैं। जमीनी स्तर पर कोई सुविधा नहीं है। जब तक सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी तो खिलाड़ियों से कैसे पदक की उम्मीद की जा सकती हैं।
- मोनू, खिलाड़ी।
खिलाड़ी घर से पीने का पानी ला रहे हैं। 40 से 50 खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। मगर हॉल छोटा होने के कारण अभ्यास बाधित हो रहा है। नर्सरी में न तो पीने का पानी और न ही शौचालय की सुविधा है। खिलाड़ियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। खेल विभाग को ध्यान देने की जरूरत है।
- सतबीर सिंह, संचालक, नर्सरी, श्यामसुख।