झोझूकलां। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की झोझूकलां शाखा की ओर से झोझू खुर्द ब्रह्माकुमारीज पाठशाला में 88वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती मनाई गई। इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी वसुधा ने कहा कि परचिंतन पतन की जड़ है जबकि स्वचिंतन और परमात्म चिंतन उन्नति की सीढ़ी है।
उन्होंने कहा कि परचिंतन परदर्शन और व्यर्थ की बातों को छोड़ परमपिता परमात्मा शिव में ध्यान लगाने से हमारे संस्कार दिव्य बनते हैं और अपनी भारतीय संस्कृति के मूल्यों को भी पुनः स्थापित करने में मदद मिलती है।
ब्रह्माकुमारी नीलम ने कहा कि परमपिता परमात्मा शिव कल्याणकारी है, जो सभी मनुष्य आत्माओं को काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, आलस्य आदि विकारों से छुटकारा दिलाकर देवता बनाने का कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस पावन पर्व पर हमें अपने अंदर की बुराई और अवगुणों को त्यागकर अच्छाई, दिव्यगुणों को धारण करने का संकल्प लेना चाहिए। इससे घर, परिवार, समाज भी सुख-शांति से खुशहाल हो जाएगा। कार्यक्रम में सभी ब्रह्मकुमारीज और महिलाओं ने शिव ध्वज लेकर यात्रा निकाली और सभी को परमात्मा शिव के सत्य अवगत कराया। इससे गांव में धार्मिक संदेश मिला। इसे लोगों ने खूब सराहा। कई लोगों ने संस्था से जुड़ने के लिए सदस्यों से जानकारी भी ली।