शहर में पहली बार ट्रेंचलेस टेक्निक के जरिए बिना खुदाई किए डेवलप हो चुकी कॉलोनियों में सड़क तोड़े बगैर ही सीवरेज लाइन बिछाने का काम होगा। जन स्वास्थ्य विभाग ने मिलगेट एरिया में इस कार्य की शुरुआत भी कर दी है। बिना सड़क तोड़े और बिना खुदाई के सीवरेज लाइन डल जाएगी। न ही तीन से चार मंजिला बने मकानों को हानि पहुंचेंगी और न ही सड़कों को। लोगों को सहूलियत भी मिलेगी। जनस्वास्थ्य विभाग ने पूरे मिलगेट एरिया में इस टेक्निक से काम करवाने के लिए करीब पौने दो करोड़ रुपये का टेंडर पानीपत की कंपनी को अलॉट किया है।
25 से ज्यादा कॉलोनियों को फायदा
जनस्वास्थ्य विभाग ट्रेंचलेस टेक्निक से करीब एक किलोमीटर लंबी लाइन डालेगा। यह लाइन कई कॉलोनियों से होकर निकलेगी। करीब 13 से 14 फीट की गहराई में यह लाइन डाली जा रही है। इस लाइन से करीब 25 से अधिक कॉलोनियों को फायदा मिलेगा।
12 क्वार्टर रोड से मिलगेट पार्क के पास मेनहोल में जुड़ेगी लाइन
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह लाइन 12 क्वार्टर रोड से स्टार्ट हुई। जो कप्तान स्कूल के सामने वाली मेन गली से होते हुए लेफ्ट टर्न लेगी। फिर जिंदल पार्क के साथ साथ होते हुए मिलगेट रायपुर रोड पर मिल जाएगी। रायपुर रोड के साथ साथ यह जिंदल पार्क के कॉर्नर के पास मुख्य बड़े मेनहोल से इसे कनेक्ट किया जाएगा।
एस्टीमेट - 1.75 करोड़
गहराई - 14 फुट
एक बार में मशीन की क्षमता - 200 फीट लंबी लाइन डालने की
सीवरेज लाइन डाली जाएगी - 20 इंच
फायदा - मिलगेट एरिया की 25 से अधिक कॉलोनियों को
काम पूरा होगा - करीब 2 से 3 महीने के अंतराल में
इस तकनीक के फायदे
- डेवलेप हो चुकी कॉलोनियों में भी सीवरेज लाइन बिछाई जा सकती है।
- बिना सड़क तोड़े यानी बिना अधिक नुकसान के लाइन बिछाई जा सकती है।
- पानी की लाइन, सीवरेज की लाइन जो पहले से बिछी है उन्हें कोई नुकसान नहीं।
जानिए तकनीक के बारे में
यह एक तरह से ऑप्टिकल फाइबर लाइन डालने के लिए यूज की जाने वाली मशीन की तर्ज पर काम करती है। मशीन एक बार में करीब 200 फुट तक जमीनी के नीचे ही नीचे सीवरेज बिछा सकती है। इसके आगे फिर छोटा गड्ढा कर मशीन लगानी पड़ती है। मिलगेट एरिया में जनस्वास्थ्य विभाग यहां केवल वहीं गड्ढा बना रहे हैं जहां मेनहोल बनाना है।
ऐसे स्थानों पर अधिकतर यूज होती है तकनीक
- जहां सड़कें या गलियां कम चौड़ी हो यानी सीवरेज लाइन डालने के किए की जाने वाली खुदाई के लिए स्पेस न हो।
- बालू मिट्टी का एरिया जहां ढहने का अधिक डर हो वहां इस तकनीक का सेफ्टी के आधार पर भी सहारा लिया जाता है।
पहली बार हुई थी भिवानी में यूज
नवंबर 2011 में इस तरह की टेक्निक प्रदेश में केवल भिवानी में यूज हुई थी, जिसमें भिवानी के घंटाघर चौक से मुख्य डिस्पोजल तक गहरी सीवर लाइन को सीआईपी तकनीक द्वारा ठीक किया गया था। इंटरनेशनल स्तर की यह तकनीक उस समय पहली बार हरियाणा में इस्तेमाल की गई थी। इसी तकनीक का इस्तेमाल दिल्ली में भूमिगत मेट्रो लाइन के निर्माण के दौरान भी किया गया था।
शहर में पहली बार ट्रेंचलेस सीवरेज लाइन डाली जा रही है। इसका करीब पौने दो करोड़ का एस्टीमेट है। यह काम करीब दो से तीन महीने में पूरा हो जाएगा।
- नरेश, जूनियर इंजीनियर जनस्वास्थ्य विभाग
अच्छी टेक्निक है। बिना खुदाई व सड़क तोड़े काम किया जा रहा है। निगम के भी लाखों रुपये बर्बाद होने से बच गए। वरना लाइन डालने के लिए सड़कें तोड़नी पड़ती।
- मास्टर प्रहलाद, पार्षद वार्ड नंबर 7