हिसार। युवा रक्तदाताओं ने जिले के ब्लड बैंक भर दिए। हॉस्टल में रहकर कई महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने वाले युवाओं के गांव लौटने पर सिर्फ गर्मियों के अवकाश के दौरान कमी रहती है। जिला नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में सैपरेटर और डीप फ्रीजर समेत सभी जरूरी उपकरण हैं। एक मशीन के सहारे प्लेटलेट लेकर अन्य रक्त कणिकाएं वापस रक्तदाता के शरीर में तत्काल डालने की भी सुविधा है।
डेंगू व अन्य मरीजों को पूरा खून चढ़ाने के बजाय सिर्फ प्लेटलेट चढ़ाई जा रही है। इसकी वैधता सबसे कम पांच दिन की होती है जबकि प्लाज्मा और क्रायोप्रेसिपिटेट यानी क्रायो के स्वरूप का खून साल भर तक सुरक्षित रखा जा सकता है। पैक्ड रेड ब्लड सेल्स (पीआरबीसी) पूरे रक्त से प्लाज्मा को हटाकर तैयार किया जाता है और इसका उपयोग उन रोगियों को रक्त चढ़ाने के लिए किया जाता है जिन्हें एनीमिया या चोट आदि से रक्त की भारी हानि हुई है। इसे 42 दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है। जिला नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में पीआरबीसी स्वरूप का खून सर्वाधिक 116 यूनिट उपलब्ध है। एफएफपी स्वरूप में 97 यूनिट, क्रायो स्वरूप में 78 और 32 यूनिट खून उपलब्ध है। जिला अस्पताल की पीएमओ डॉ. रीना जैन ने बताया सामान्य स्थिति में हर जरूरतमंद मरीज को उसके ग्रुप का खून ही चढ़ाया जा रहा है। आपातकालीन परिस्थितियों में ही ओ ग्रुप का खून चढ़ाया जाता है।
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जिले की कई स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े लोग नियमित रूप से रक्तदान शिविर लगवा रहे हैं। कई रक्तदाता व्यक्तिगत रूप से भी अपने या प्रिय व्यक्ति के जन्मदिन जैसे अवसर पर रक्तदान कर रहे हैं। जरूरत के मुताबिक बुलाने के लिए स्वैच्छिक रक्तदाताओं की सूची भी उपलब्ध है। - डॉ. सुशील गर्ग, प्रभारी, ब्लड बैंक, जिला नागरिक चिकित्सालय, हिसार