हिसार। गांव रावलवास में शुक्रवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग, दलहन विभाग के वैज्ञानिक डाॅ. सुनील, डॉ. पवन, डॉ. लक्ष्मी की टीम प्रगतिशील किसान कृष्ण कुमार के खेत में पहुंची। वैज्ञानिकों की टीम ने कृष्ण के खेत में लगाई हरियाणा काबुली चने की नई किस्म एचए-5 का अवलोकन किया।
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने कहा कि किसान नई व उन्नत किस्मों का उपयोग करें। हमेशा बीजोपचार के बाद ही बिजाई करें। एचए-5 की बिजाई किसानों के लिए लाभदायक साबित होगी। दलहन वैज्ञानिक डॉ. सुनील ने बताया कि एचए-5 महज 145 दिनों तैयार हो जाती है। आमतौर पर चने की फसल को 150 दिन लगते हैं। बिना किसी रासायनिक उर्वरक के सहायता के पूर्ण रूप से प्रकृति पद्धति और कम सिंचाई का प्रयोग करके किसान एक एकड़ में एक से सवा लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस किस्म की बिजाई नवम्बर महीने में की गई थी। अप्रैल की 10 तारीख तक फसल कटने के लिए तैयार हो जाएगी। इस मौके पर किसान मेनपाल पूनिया, राकेश सुंडा, मांगेराम, दिलीप सिंह, कपिल कुमार, अमित झाझड़िया, अजय, हवा सिंह रहे।