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Hisar News: एचएयू और न्यूजीलैंड की मैसी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक मोरिंगा पर संयुक्त रूप से करेंगे शोध कार्य

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हिसार। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के जैव रसायन विभाग की ओर से ‘मोरिंगा (सहजन) की क्षमता को पहचानना : विश्व स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता के अवसर’ विषय पर 10 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज मुख्यातिथि रहे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत एचएयू और न्यूजीलैंड की मैसी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक मोरिंगा पर संयुक्त रूप से शोध कार्य करेंगे। इस कार्यशाला में 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया जिसमें एचएयू के अलावा जीजेयू, एसकेएनएयू जोबनेर, डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फोरेस्ट्री व उतरांचल यूनिवर्सिटी देहरादून, के विद्यार्थी व वैज्ञानिक शामिल थे।
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कुलपति प्रो. कांबोज ने कहा कि मोरिंगा स्वास्थ्य लाभ वाले पोषक तत्वों का एक प्रमुख स्रोत है। मोरिंगा सेहत के लिए वरदान है। इस पौधे के सभी भाग फायदेमंद होते हैं, लेकिन इसके पत्ते अधिक गुणकारी होते हैं। कुलपति ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र व मोरिंगा के पौधे भी वितरित किए।
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि मोरिंगा को लेकर विश्व स्तर पर अनुसंधान किए जा रहे हैं। मोरिंगा की खासियत यही है कि इसे पानी की कमी होने की स्थिति में भी उगाया जा सकता है। विभागाध्यक्ष डॉ. जयंती टोकस ने इस कार्यशाला एवं प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न सत्रों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। शोधार्थी अमीषा व सुजीता ने कार्यशाला के संबंध में अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला के दौरान डॉ. चंद्रेश कुमारी, डॉ. अक्षय भूकर, डॉ. क्रेग मैकगिल, डॉ. योगेश जिंदल, डॉ. भागीरथ सिंह चौहान, डॉ. राजेंद्र सांगवान, डॉ. ब्लेयर मोसेस कामांगा, डॉ. नीरू रेडू, डॉ. जसबीर सिंह, डॉ. अमित गोस्वामी सहित डॉ. संदीप आर्य ने मोरिंगा से संबंधित अपने व्याख्यान दिए।
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