हिसार के नारनौंद क्षेत्र के गांव मिर्चपुर में जातीय हिंसा के 12 साल बाद पहली बार अनुसूचित वर्ग की महिला गांव की सरपंच बनी हैं। रजनी (24) वर्ष 2017 में अंतरजातीय विवाह कर दुल्हन बनकर गांव मिर्चपुर में आई थीं। नवनिर्वाचित सरपंच रजनी ने कहा कि अतीत में बदनाम हुए मिर्चपुर को आदर्श ग्राम बनाने के लक्ष्य को लेकर काम करूंगी।
नारनौंद खंड की सबसे बड़ी जीत की दर्ज
गांव में सरपंच का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित था। रजनी ने नारनौंद खंड में 1628 वोटों से सबसे बड़ी जीत दर्ज की है, उन्हें 2987 वोट मिले। उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी अनीता को 1359 वोट मिले। गांव में 7113 मतदाता हैं। रजनी ने कहा कि वह गांव में भाईचारा बनाने और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर तलाशेंगी। मिर्चपुर गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने के लिए प्रयास करेंगे। खेतों से बारिश के पानी की निकासी सहित गांव कई समस्याओं का सामना कर रहा है।
सरपंच का चुनाव लड़ने वाली 9 उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी चेतना ने कहा कि रजनी को ऊंची जाति के परिवार में शादी करने का फायदा मिला। प्रत्याशी रही रीना के पति रूपेश ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताई, जिसमें एक अनुसूचित जाति की महिला को उच्च जाति के युवक से शादी करने के बाद भी आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाती है। गांव में हिंसा के बाद बनी शांति समिति के सदस्य मास्टर चंद्रप्रकाश ने कहा कि उन्होंने अतीत को पीछे छोड़ दिया है। अब गांव में पूर्ण सद्भाव है।
मिर्चपुर हिंसा प्रकरण में 20 अभियुक्तों को सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा
याद रहे कि अप्रैल 2010 में गांव मिर्चपुर जातिगत हिंसा के कारण सुर्खियों में आया था। एक कुत्ते की पिटाई के मामले को लेकर अनुसूचित वर्ग के दो लोगों को भीड़ ने पीटा और उनके घरों में आग लगाकर उन्हें जिंदा जला दिया था। इसके बाद हिंसा प्रभावित करीब 250 परिवारों ने गांव छोड़ दिया था।
कई साल बाद इन परिवारों को हिसार शहर के पास प्लाट देकर दीनदयालपुरम में बसाया गया है। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंसा के लिए 20 अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में अभियुक्त पक्ष के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रखी है।