हिसार। चौ. देवीलाल संजीवनी अस्पताल के बेड पिछले 15 दिन से पूरी तरह से खाली हैं। यहां तैनात 300 लोगों का स्टाफ रोस्टर के अनुसार ड्यूटी कर वापस लौट जाता है। इस अस्पताल के चार ब्लॉक बनाए गए हैं। जिसमें तीन ब्लाक को शुरू ही नहीं किया गया। केवल एक ब्लाक को ही खोला गया था। इस अस्पताल में केवल 260 मरीजों ने उपचार लिया। जिसमें 12 मरीजों की मौत हो गई।
प्रदेश सरकार ने जिंदल स्कूल के परिसर में 500 बेड का अस्थायी अस्पताल बनाया था। चौधरी देवीलाल संजीवनी अस्पताल के नाम से बने इस अस्पताल पर सरकार ने करीब 29 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कुल 18 दिन में इस अस्पताल को बनाया गया था। अस्पताल में पहले ब्लॉक में 230 बेड, दूसरे ब्लॉक में 120 बेड, तीसरे व चौथे ब्लॉक में 72-72 बेड का प्रावधान किया गया था। 8 बेड इमरजेंसी के लिए रखे थे। 16 मई को सीएम मनोहरलाल ने इस अस्पताल का शुभारंभ किया था। जिसमें पहले दिन 10 मरीजों को भर्ती किया गया था। अस्पताल में दूसरे दिन 30 मरीज भर्ती हुए। तीसरे दिन तक यह संख्या 90 पहुंच गई। इसके बाद मरीजों की संख्या कम होती रही। अस्पताल में पहले 90 से कम ऑक्सीजन वाले मरीजों को भर्ती नहीं किया गया जा रहा था। बाद में इसे 85 कर दिया गया। पहले बीस दिन में अस्पताल में 260 मरीजों ने लाभ लिया। पिछले करीब 15 दिन से अस्पताल में एक भी मरीज नहीं है।
केस कम हुए, पर नहीं घटाया स्टाफ
इस समय जिले में केस भी कम हो गए है और अस्पताल में भी इक्का-दुक्का मरीज दाखिल है। फिर भी अस्पताल में स्टाफ घटाया नहीं गया है, जो स्टाफ शुरू में लगा था। जब अस्पताल में मरीज ही नहीं तो स्टाफ क्या करेगा। ऐसे में बाकी स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि अपने रेगुलर कामकाज से हटाकर इनकी ड्यूटी संजीवनी अस्पताल में लगाई गई थी। चाहे वह अधिकारी हो या चिकित्सक। इनकी गैर मौजूदगी में बाकी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होना लाजमी है। कुछ ऐसे चिकित्सक भी है जिनको अतिरिक्त कार्यभार सौंपा हुआ है।
स्टाफ की स्थिति
चिकित्सक 60
नर्सिंग सिस्टर 50
फार्मेसी ऑफिसर 54
एमबीबीएस स्टूडेंट्स 100
स्टाफ नर्स 12
आउट सोर्सिंग नर्स 21
पेरामेडिकल स्टाफ 60
6 माह के लिए बनाया
संजीवनी अस्पताल को छह महीने के लिए बनाया गया है। अस्पताल ने चिकित्सकों सहित अन्य स्टाफ को छह महीने के लिए नियुक्त किया है। दूसरी लहर खत्म होने के बाद अब अस्पताल में कोई मरीज नहीं है। स्वास्थ्य विभाग अस्पताल को छह महीने तक रखेगा। तीसरी लहर का खतरा निपट जाने के बाद ही इस अस्पताल को हटाने पर फैसला लिया जाएगा।
न आईसीयू न वेंटिलेटर की सुविधा
संजीवनी अस्पताल के सभी 500 बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा दी गई। अस्पताल में एक भी वेंटिलेटर नहीं है। अस्पताल में आईसीयू भी नहीं बनाया गया है। अस्पताल में आईसीयू बनाया जाना था। दूसरी लहर के कमजोर पड़ने के बाद इस पर काम नहीं हुआ। इस अस्पताल को जिंदल इंडस्ट्रीज के करीब बनाया गया है। जिंदल इंडस्ट्रीज से आ रही ऑक्सीजन को यहां मरीजों को सीधे ही आपूर्ति दी जा रही है।
गेट पर पुलिस, अंदर कोई नहीं
अस्पताल के गेट पर दो महिला और दो पुरुष पुलिस कर्मी थे। अंदर गेट पर अस्पताल के लिए नियुक्त महिला कर्मी, एक पुरुष कर्मी नजर आया। वार्ड पूरी तरह से खाली था। शाम 5 बजे बजे के बाद यहां चिकित्सक नजर नहीं आए।
अभी स्टाफ कम करने के बारे में कोई निर्देश नहीं आया है। करीब 300 स्टाफ कर्मी तैनात हैं। अभी केस कम हुए तो काफी हद तक राहत मिली है। हमने पहले चरण में पहला ब्लाक ही शुरू किया गया था। अन्य ब्लॉक खोलने की नौबत नहीं आई। - डॉ. राजेश कुमार, डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, संजीवनी अस्पताल, हिसार