हिसार। शहर में कोरोना मरीजों के लिए बनाए गए 500 बेड के चौधरी देवीलाल संजीवनी अस्पताल में गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर की सुविधा न होने के कारण उन्हें भर्ती नहीं किया जा रहा है।
प्रबंधन के अनुसार जिन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल 80 तक है, उनका ही इलाज किया जा रहा है। इससे गंभीर मरीजों को उच्च स्तरीय सुविधा वाले अस्पताल ले जाने के लिए बोल दिया जाता है। उधर, बुधवार दोपहर तक संजीवनी अस्पताल में दाखिल मरीजों में से आठ मरीजों की मौत हो गई। फिलहाल अस्पताल में करीब 80 मरीज उपचाराधीन हैं।
केस एक
नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रधान व कोरोना योद्धा प्रवीण कुमार की कोरोना संक्रमित होने के बाद तबीयत बिगड़ने पर उनके परिजन उन्हें संजीवनी अस्पताल लेकर गए। परिजनों ने सोचा कि अस्पताल में उन्हें अच्छा इलाज उपलब्ध हो जाएगा। जिस समय परिजन उन्हें वहां लेकर पहुंचे, उनका ऑक्सीजन का स्तर कम था। अस्पताल प्रशासन ने यह कहते हुए उन्हें दाखिल करने से मना कर दिया कि मरीज का ऑक्सीजन स्तर कम है और उनके पास वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है।
केस दो
उकलाना के साहू गांव निवासी कोरोना संक्रमित महिला की मंगलवार रात तबीयत बिगड़ गई। इस पर बुधवार को महिला के परिजन उसे हिसार लेकर आए। मगर किसी भी अस्पताल में उन्हें बेड नहीं मिला। इस दौरान वह संजीवनी अस्पताल में भी गए। परिजनों के अनुसार महिला का ऑक्सीजन स्तर उस समय 82 पर था, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने महिला को दाखिल नहीं किया। उनका कहना था कि महिला का ऑक्सीजन स्तर कम है, इसलिए वह उसे दाखिल नहीं कर सकते। आखिर में महिला के परिजन उसे बरवाला लेकर चले गए।
इन चिकित्सकों ने किया ज्वाइन
इस अस्पताल के लिए स्वास्थ्य विभाग से 11 चिकित्सक मिले थे, जिनमें से अभी तक 9 ने ज्वाइन किया है। वहीं ईएसआई से मिले 19 में से 11 चिकित्सकों ने ज्वाइन किया है। इसके अलावा ईएसआई से अस्पताल को 25 और चिकित्सक मिले हैं, जिनके मंगलवार को ही ऑर्डर हुए हैं।
अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं
अस्पताल में वेंटिलेंटर की सुविधा नहीं है, इसलिए ज्यादा गंभीर मरीजों को दाखिल नहीं किया जा रहा है। वैसे हम 80 तक ऑक्सीजन लेवल वाले मरीजों को दाखिल कर रहे हैं। बुधवार दोपहर तक आठ मरीजों की मौत हो चुकी है।
-डॉ. राजेश, प्रभारी, संजीवनी अस्पताल।
अस्पताल में नहीं आवश्यक सुविधाएं
हिसार में जिस 500 बेड वाले कोविड अस्पताल का ड्रामा रचा गया, उसमें कोविड मरीजों के लिए न तो वेंटिलेटर हैं और न ही पर्याप्त डॉक्टर व अन्य जरूरी चिकित्सा सुविधाएं। आज जिले के लगभग सभी सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में कोविड मरीजों के चलते बेड फुल है। लोगों को जगह नहीं मिल पा रही है, लेकिन सरकार का ये नकली हाईफाई प्रचारित अस्पताल खाली पड़ा है, क्योंकि इस अस्पताल में कोविड मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाएं ही नहीं हैं।
-कुलदीप बिश्नोई, विधायक व कांग्रेस वर्किंग कमेटी सदस्य।