हिसार। वार्ड-11 स्थित सातरोड़ गांव में सरकारी जमीन पर बिना अनुमति समाधि स्थल का निर्माण किया जा रहा था। सूचना मिलने पर निगमायुक्त के आदेश पर बुधवार सुबह अधिकारी निर्माण तोड़ने पहुंचे तो लोगों ने विरोध कर दिया। लोगों ने कहा कि इस जगह पर साधुओं की समाधि बनी हुई हैं, वह इसमाधियों का लेवल उठा रहे हैं।
इसके बाद वार्ड के लोग पार्षद राजपाल मांडू के नेतृत्व में निगमायुक्त से मिलने पहुंचे। लोगों ने निगमायुक्त से कहा कि यह एक पुराना धार्मिक स्थल है और इसे तोड़ा न जाए। इस पर निगमायुक्त ने हाउस की बैठक में इस बारे में प्रस्ताव लाने का आश्वासन दिया तो लोगों ने निर्माण कार्य रोक दिया।
साधुओं व निगम अधिकारियों के बीच हुई बहसबाजी
निगम प्रशासन को दो दिन पहले यहां निर्माण कार्य की सूचना मिली तो निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने इस निर्माण को तोड़ने के लिए अधिकारियों को आदेश दिए। इस पर बुधवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे निगम के अधिकारी जेसीबी लेकर मौके पर पहुंच गए। जैसे ही स्थानीय लोगों को इस बारे में पता लगा तो वह भी निर्माण स्थल पर पहुंचे। साधुओं ने निगम अधिकारियों से स्पष्ट तौर पर कहा कि निर्माण स्थल को नुकसान पहुंचाया तो ठीक नहीं होगा। इस पर पार्षद राजपाल मांडू ने दोनों पक्षों के बीच-बचाव किया। अधिकारियों ने लोगों से कहा कि यह जमीन सरकारी है और आपने निर्माण कार्य शुरू करने से पहले निगम की अनुमति तक नहीं ली। आपको पहले निगम से अनुमति लेनी होगी।
जानकारी के अनुसार सातरोड़ में 16 मंदिर हैं। इन मंदिरों में साधु भी रहते हैं। इसके अलावा मंदिरों में समय-समय भंडारों व अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जब कभी किसी की मौत हो जाती है तो क्षेत्र में निर्धारित की गई जमीन पर उसकी समाधि बना दी जाती है। इसे लेकर वर्षों पहले पंचायत की तरफ से शिव शक्ति मंदिर के सामने 2 एकड़ जमीन दी गई थी। चूंकि सड़क का लेवल ऊंचा उठने से जमीन नीची हो गई है। बारिश के दिनों में यहां जलभराव हो जाता है। इस जगह की चहारदीवारी भी नहीं है, जिस कारण इस जगह गंदगी पड़ी है। इसी को देखते हुए लोगों ने इन समाधियों का लेवल उठाने का फैसला लिया था।
जिस जगह निर्माण किया जा रहा है, वह जमीन निगम के अधीन आती है और यहां बिनाअनुमति निर्माण नहीं किया जा सकता। इसे लेकर क्षेत्रवासियों व निगम प्रशासन के बीच बातचीत हो गई है। फिलहाल निर्माण कार्य को रोक दिया गया है।
- संदीप सिहाग, एक्सईएन, नगर निगम