बैठक में आरटीआई के प्रति जागरूक करते राज्य सूचना आयुक्त जयसिंह बिश्नोई।
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राज्य सूचना आयुक्त जयसिंह बिश्नोई का कहना है कि सरपंच व ग्राम सचिव पंचायत संबंधी रिकॉर्ड की जानकारी देने से डरें नहीं, बल्कि जन सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के संबंध में पूरी जानकारी प्राप्त करके आवेदक को निर्धारित समयावधि में सूचनाएं प्रदान करें। जयसिंह बिश्नोई लघु सचिवालय स्थित जिला सभागार में बीडीपीओ, सरपंच (एसपीआईओ) व ग्राम सचिव (एएसपीआईओ) के लिए जन सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के महत्वपूर्ण प्रावधानों के बारे में आयोजित जागरूकता शिविर को संबोधित कर रहे थे।
बिश्नोई ने कहा कि जो निजी संस्थाएं सरकार से एक पैसे का भी लाभ लेती हैं, वे सभी आरटीआई के दायरे में आती हैं। ये निजी या अर्ध सरकारी संस्थाएं सार्वजनिक दायरे की सूचनाएं देने से मना नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि जो सूचना मांगी जाए, उसका 30 दिन में जवाब देना जरूरी है। यदि अपेक्षित सूचना आपसे संबंधित नहीं है तो इस संबंध में आवेदक को सूचित कर दें। यदि सूचना किसी अन्य विभाग से संबंधित है तो पांच दिन में उस विभाग को प्रेषित कर दें तथा इसकी सूचना आवेदक को भी दे दें। यदि सूचना निर्धारित से अधिक पन्नों में है तो इसके लिए अपेक्षित फीस जमा करवाने की डिमांड की जा सकती है।
जान-बूझकर जानकारी न देने पर जुर्माने का प्रावधान
उन्होंने बताया कि पंचायत चुनाव के बाद ग्राम सचिव सरपंच का रिकॉर्ड अपने अधिकार में लें और उसे नवनिर्वाचित सरपंच के सुपुर्द करके इसकी पावती प्राप्त करे। जान-बूझकर जानकारी न देने पर जुर्माने का प्रावधान है और ऐसा करने पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। यदि किसी सरपंच द्वारा पुराने रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई है तो बीडीपीओ व डीडीपीओ को सूचना देकर उनके माध्यम से एफआईआर दर्ज करवाएं। इस मौके पर डीडीपीओ अश्वीर सिंह, बीडीपीओ संदीप भारद्वाज सहित कई अधिकारी व कर्मचारी और सरपंच व ग्राम सचिव मौजूद थे।