हिसार। राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजी का स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले अंकुश पंघाल के गांव भेरियां में मानो खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने पर अंकुश लगा है। गांव में आज भी खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए न खेल नर्सरी है और न ही प्रशिक्षित कोच।
शहर से करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव के स्टेडियम में खेल सुविधाओं का अभाव है। गांव ने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर का मुक्केबाज दिया लेकिन नई पीढ़ी को खेल प्रशिक्षण के लिए उचित व्यवस्था का इंतजार है।
ग्रामीणों का कहना है कि अंकुश समेत कई खिलाड़ियों ने सरकारी सुविधाओं के भरोसे नहीं बल्कि अपने दम पर मेहनत कर मुकाम हासिल किया है। अंकुश पंघाल की राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्णिम सफलता पर ग्रामीणों की उम्मीद जगी है कि अब गांव के युवाओं में खेलों के प्रति रुचि बढ़ेगी।
गांव में नियमित प्रशिक्षण, खेल उपकरण और प्रशिक्षित कोच उपलब्ध हों तो यहां से कई और खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। ग्रामीण राजेंद्र, सोनू सेन का मानना है कि ऐसे सम्मान से अंकुश का मनोबल बढ़ेगा और गांव के दूसरे युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी। बीडीसी सदस्य बबली का कहना है कि अंकुश की सफलता को केवल सम्मान तक सीमित रखने के बजाय उनके गांव में खेल सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
गांव में खेल स्टेडियम तो बना है लेकिन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए कोच तक नहीं है। ऐसे में मैदान और अन्य सुविधाएं होने के बावजूद युवा खिलाड़ियों को सही तकनीक और प्रशिक्षण के लिए बाहर का रुख करना पड़ता है। ग्रामीणों की मांग है कि स्टेडियम में अलग-अलग खेलों के प्रशिक्षित कोच नियुक्त किए जाएं।