मंडी आदमपुर। मतदाताओं ने चुनावी नतीजे देकर चौंका दिया। 56 साल से अभेद्य पूर्व सीएम चौधरी भजनलाल के गढ़ को पहली बार चुनाव मैदान में उतरे कांग्रेस के चंद्रप्रकाश ने ढहा दिया। हालांकि उन्हें भजनलाल के पोते भव्य बिश्नोई ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन 1268 वोटों से हार गए।
पूर्व उपप्रधानमंत्री देवीलाल, प्रोफेसर गणेशीलाल, पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के पुत्र सुरेंद्र सिंह, पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला के भाई रणजीत सिंह, पूर्व गृहमंत्री प्रो. संपत सिंह, केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश जैसे दिग्गज यहां जीत दर्ज करने में नाकामयाब रहे, लेकिन सेवानिवृत्त आईएएस चंद्रप्रकाश ने यहां से जीत हासिल की।
भजनलाल परिवार को तीसरी बार सेवानिवृत आईएएस से झेलनी पड़ी हार
सेवानिवृत्त आईएएस प्रत्याशी से भजनलाल परिवार को अब तक तीन बार हार का सामना करना पड़ा है। पहली बार 1999 में करनाल लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी सेवानिवृत्त आईएएस आईडी स्वामी ने पूर्व सीएम भजनलाल को हराया था। इसके बाद 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में रिटायर्ड आईएएस बृजेंद्र सिंह ने भव्य बिश्नोई को हराया। अब विधानसभा चुनाव में सेवानिवृत्त आईएएस चंद्रप्रकाश ने भव्य बिश्नोई को पराजित किया। चंद्रप्रकाश पूर्व राज्यसभा सदस्य स्व. रामजीलाल के भतीजे हैं, जिन्हें चौधरी भजनलाल ने ही राज्यसभा में भेजा था। स्व. रामजीलाल और पूर्व सीएम भजनलाल की दोस्ती की मिसाल लोग आज भी देते हैं।
बिश्नोई परिवार को अति आत्मविश्वास पड़ा भारी
कांग्रेसी प्रत्याशी चंद्रप्रकाश को टिकटों के सभी दावेदारोंं को साथ लेकर चुनाव लड़ने का लाभ मिला। वहीं भाजपा के भव्य बिश्नोई व उनके पिता कुलदीप बिश्नोई का अति आत्मविश्वास उन पर भारी पड़ा। चंद्रप्रकाश ने जहां सभी दावेदारों को अलग-अलग गांवों में भेजकर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने का काम किया। वहीं, कुलदीप बिश्नोई अपने बेटे के चुनाव के बावजूद दूसरे प्रत्याशियों के हलके में प्रचार करते रहे, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।
1968 से आदमपुर में भजनलाल परिवार का कब्जा
आदमपुर विधानसभा सीट पर पहली बार वर्ष 1968 से भजनलाल परिवार को जीत मिली। 1968 से 1982 तक भजनलाल विधायक रहे। 1987 में उनकी पत्नी जसमा देवी विधायक बनीं। इसके बाद 1991 से 2008 तक फिर भजनलाल आदमपुर के विधायक बने, 2009 में कुलदीप बिश्नोई और 2011 के उपचुनाव में उनकी धर्मपत्नी रेणुका और 2014 में फिर कुलदीप बिश्नोई विधायक बने। 2019 में कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस की टिकट पर विधायक बने। 2022 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उपचुनाव में भव्य बिश्नोई पहली बार विधानसभा पहुंचे।
मैं आदमपुर की जनता का आभारी हूं। चौधरी भजनलाल का परिवार मेरे लिए आदरणीय है। सामाजिक दायरा अलग होता है राजनीति अलग। आदमपुर को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करेंगे। अपने आदमपुर में लोगों को उम्मीदों को पूरा करेंगे। विपक्ष में रह कर भी पूरी आवाज उठाएंगे। अपने क्षेत्र के लिए पूरा काम करेंगे। जनता के बीच रह कर उनकी समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। - चंद्रप्रकाश, नवनिर्वाचित विधायक आदमपुर
मैं आदमपुर की जनता आभार जताता हूं। आदमपुर हमेशा परिवार रहेगा। पिछले दो साल विधायक रहते हुए जनसेवा करने का पूरा प्रयास किया। ईमानदारी और निष्ठा के साथ सेवा करते रहेंगे। पहले भी सेवा करते रहे अब भी सेवा करते रहेंगे। भगवान से आदमपुर की तरक्की के लिए हमेशा प्रार्थना करता रहूंगा। आदमपुर के हर एक मतदाता, कार्यकर्ता का दिल से आभार व्यक्त करता हूं। बेहद शांतिपूवर्क तरीके से चुनाव कराने के लिए भी जनता का आभार। आदमपुर की सेवा करने के लिए किसी पद की जरूरत नहीं है। - भव्य बिश्नोई, भाजपा प्रत्याशी, आदमपुर