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मोरिंगा पर पर्यावरणीय प्रभावों का शोध बेहद जरूरी : प्रो. बीआर कांबोज

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कुलपति प्रो. बीआर कांबोज अधिकारियों एवं प्रतिभागियों के साथ
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हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में मंगलवार को स्पार्क परियोजना के तहत मोरिंगा की वृद्धि, बीज गुणवत्ता, एंटीऑक्सीडेंट और टैनिन गुणों पर पर्यावरणीय प्रभावों की समझ विषय पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज और विशिष्ट अतिथि स्पार्क के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. रबीब्रत मुखर्जी रहे। 14 दिवसीय इस कार्यशाला में सात राज्यों के विभिन्न विश्वविद्यालयों के स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी विद्यार्थी भाग ले रहे हैं।
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कुलपति प्रो. कांबोज ने कहा कि तापमान, आर्द्रता, वर्षा और मिट्टी जैसे पर्यावरणीय कारक मोरिंगा की वृद्धि, फूलन-फलन और बीज गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करते हैं। बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के कारण मोरिंगा के औषधीय गुणों में होने वाले बदलाव पर शोध को अत्यंत आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य की टिकाऊ कृषि, पोषण सुरक्षा और प्राकृतिक स्वास्थ्य उत्पाद उद्योगों के लिए ऐसे अध्ययन अहम भूमिका निभाएंगे। इस अवसर पर कुलपति ने कार्यशाला से संबंधित पुस्तक का विमोचन भी किया।
डॉ. रबीब्रत मुखर्जी ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण मोरिंगा के बीज और पत्तियों में टैनिन व एंटीऑक्सीडेंट गुणों पर पड़ने वाले प्रभावों का शोध कार्य किया जाएगा। स्पार्क के तहत मोरिंगा प्रोजेक्ट से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां देशभर में संचालित की जा रही हैं और एचएयू में भी इस दिशा में विस्तृत शोध जारी है।
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कार्यक्रम में अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि मोरिंगा, जिसे ड्रमस्टिक या सहजन के रूप में जाना जाता है, एक उष्णकटिबंधीय पौधा है जिसकी प्रमुख रूप से भारत और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में खेती होती है। जैव रसायन विभाग की अध्यक्ष डॉ. जयंती टोक्स ने बताया कि कार्यशाला में हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। प्रतिभागियों को विशेषज्ञों द्वारा मोरिंगा पर आधारित विभिन्न तकनीकी व वैज्ञानिक सत्रों के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम का संचालन छात्रा यामिनी टॉक ने किया।
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इस अवसर पर कुलसचिव सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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