बिजली निगम अगर केंद्र सरकार की योजना पर काम करे तो उपभोक्ताओं को भारी भरकम बिजली बिलों से काफी हद तक राहत मिल सकती है। जानकारों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार के रेजिडेंशियल लाइट प्रोग्राम को सिरे चढ़ाया जाए तो उपभोक्ताओं का बिल 10 से 15 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
योजना के तहत बिजली निगमों को एलईडी बल्ब के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए काम करना था। बिजली निगम के माध्यम से उपभोक्ताओं तक बाजार से आधे दाम पर एलईडी बल्ब पहुंचाने थे। इन एलईडी बल्बों की कीमत भी किश्तों में ली जानी थी। मगर बिजली निगम प्रबंधन ने इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कोई काम शुरू नहीं किया है। योजना में एक परिवार को चार एलईडी दिए जाएंगे।
सरकार की ओर से एलईडी 93 रुपये में मिलेगा। इसमें दस रुपये पहले जमा कराने के बाद बाकी 83 रुपये दस किस्तों में लिए वसूल किए जाएंगे।
बच जाएगी एक थर्मल जितनी बिजली
बिजली निगम के रिकॉर्ड के अनुसार दक्षिण हरियाणा बिजली निगम के तहत आने वाले 11 जिलों में करीब 29 लाख 69 हजार 321 बिजली उपभोक्ता हैं।
इसमें हर एक कनेक्शन पर औसत दो बल्ब भी माने जाएं तो करीब 60 लाख पीले बल्ब व सीएफएल को बदलकर एलईडी लगा सकते हैं। एक पीले बल्ब को हटाकर एलईडी लगाएं तो 53 वाट बिजली की बचत होती है। सभी बल्ब बदले जाएं तो रोजाना 314 मेगावाट बिजली का संरक्षण किया जा सकता है।
ऐसे समझिए बचत का गणित .....
- साधारण पीला 60 वाट के बल्ब जितनी रोशनी 14 वाट का सीएफएल तथा 7 वाट का एलएईडी देता है।
- साधारण बल्ब कभी भी फ्यूज हो सकता है। सीएफएल एक साल तथा एलईडी तीन साल चलता है।
- साधारण की बजाए सीएफएल जलाएं तो 85 तथा एलईडी लगाने पर 162 रुपये सालाना बचत होगी।
- मतलब एक घर में चार पीले बल्ब की बजाए एलइडी लगाएं तो मासिक 54 या सालाना 648 रुपये बचेंगे।
सिरसा बना था प्रदेश का पहला सीएफएल जिला
करीब दस साल पहले प्रदेश सरकार की ओर से सीएफएल को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया था। इसमें सिरसा को देश का सबसे पहला सीएफएल जिला बनने का गौरव हासिल हुआ था। सीएफएल लगाए जाने के बाद जिले में करीब 25 प्रतिशत से ज्यादा की बिजली संरक्षण हुआ। इस प्रोजेक्ट के बाद बिजली निगम संरक्षण के प्रोजेक्ट को भूल गया।
यूपी-राजस्थान से भी पिछड़ा प्रदेश
महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली में योजना के तहत एलईडी बांट दिए गए हैं। दूसरे प्रदेशों की बिजली बचत के तो केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने आंकड़े तक जारी कर दिए हैं। वहीं 11 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक एलईडी बल्ब खरीद के लिए टेंडर तक नहीं दिए गए हैं।
बिजली कार्यालय में आवेदन से मिलेगा एलईडी बल्ब
रेजिडेंशियल लाइट प्रोग्राम के तहत प्रारंभिक चरण में उपभोक्ताओं के लिए एलईडी बल्ब की व्यवस्था वैकल्पिक की गई है। उपभोक्ता जब बिजली कार्यालय में आवेदन जमा करेगा तो वहीं से उपभोक्ता को 9 वाट का एक एलईडी बल्ब दिया जाएगा। पहली बार बिजली कंपनी उपभोक्ता को एक ही बल्ब देगी।
तीन साल में 77 करोड़ एलईडी बांटेंगे
योजना के लिए केंद्र सरकार सभी प्रदेशों को सब्सिडी भी मुहैया करवा रही है। केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2018 तक देश में 77 करोड़ एलईडी बल्ब बांटने का लक्ष्य रखा गया है। इसीलिए हर प्रदेश को रियायती दर पर एलईडी बल्ब उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र सरकार ने सब्सिडी का भी प्रावधान किया है।
रेजिडेंशियल लाइट प्रोग्राम को लागू करने की प्राइमरी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई है। इसमें पहले चरण में करीब दस लाख एलईडी का आंकलन किया गया है। एलईडी आपूर्ति करने वाली एजेंसी से रेट को लेकर बातचीत चल रही है। जल्द ही इसे हरियाणा में शुरू कर दिया जाएगा।
अरुण वर्मा, एमडी, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम