फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hisar News: राखीगढ़ी में खोदाई में मिलीं अलग-अलग आकार की कच्ची और पक्की ईंटे

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रिया पंवार
विज्ञापन





हिसार। राखीगढ़ी में पिछले कई दिनों से पुरातत्व विभाग की टीम चौथे चरण की खोदाई में जुटी हुई है। इस चरण में टीम को कुछ कच्ची और पक्की ईंटें मिली हैं, जिनका आकार पिछले चरणों की ईंटों से अलग है। यह भिन्न आकार इस बात का संकेत हो सकता है कि यह हड़प्पा संस्कृति का आखिरी दौर हो। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस बारे में कोई ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि इस क्षेत्र में पहले से हड़प्पा सभ्यता के कुछ परिपक्व अवशेष भी मिले हैं। खोदाई का यह कार्य अगले तीन वर्षों तक जारी रहेगा, और इस दौरान हड़प्पा सभ्यता से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर शुभम ने बताया कि हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों पर उनके अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि पानी की कमी इस सभ्यता के अंत की एक प्रमुख वजह रही होगी। उन्होंने कहा कि इस दौर में जो संरचनाएं मिली हैं, उनका आकार और बनावट एक समान नहीं हैं, जो दर्शाता है कि हड़प्पा के अंतिम चरण में नगर नियोजन और निर्माण में एकरूपता की कमी थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस समय में नदियों का सूखना और बारिश की कमी ने लोगों को इस क्षेत्र से पलायन करने पर मजबूर किया।
विज्ञापन

संरचनाओं और अवशेषों का विश्लेषण
पुरातत्व विभाग के सुपरिंटेंडेंट आर्कोलिस्ट मनोज कुमार सक्सेना ने बताया कि खोदाई के शुरुआती चरण में ही कच्ची और पक्की ईंटों से बनी संरचनाए मिली हैं। इस काम में टीला नंबर एक, दो और तीन पर खोदाई की जा रही है। जैसे-जैसे खोदाई आगे बढ़ेगी, सिंधु नदी से जुड़े कई महत्वपूर्ण अवशेष और बैलगाड़ी के खिलौने जैसी वस्तुएं भी सामने आ सकती हैं। इसके अलावा, कुछ जंतुओं के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं, जो इस क्षेत्र की प्राचीन जीवनशैली को समझने में मददगार हो सकते हैं।
विज्ञापन

विशेषज्ञों के अनुसार राखीगढ़ी प्राचीन दृषद्वती नदी के तट पर बसा हुआ था। यह नदी सरस्वती नदी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी मानी जाती थी, और उस समय के लोगों के लिए यह जीवनदायिनी थी। दुर्भाग्यवश, यह नदी आज पूरी तरह से सूख चुकी है। नदी के सूखने की वजह से ही सिंधु सभ्यता का पतन हुआ था और यह घटना हड़प्पा संस्कृति के अंत के साथ गहरी रूप से जुड़ी हुई मानी जाती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें