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पड़ोस की लड़की को देख रविता ने चुनी कुश्ती, अब तीसरी बार बनीं जिला केसरी

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Ravita chose wrestling after seeing the girl next door, now district Kesari became third time - फोटो : Hisar
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यदि हौसले बुलंद हो तो कोई भी आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता, लेकिन कई बार दूसरों से ली गई प्रेरणा कामयाबी के शिखर तक पहुंचा देती है। ऐसी ही कहानी गांव सरसाना की रहने वाली और तीसरी बार जिला केसरी बनी रविता की है। खास बात रही कि फाइनल में दूसरा राउंड शुरू होने के साथ ही रविता ने प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी सिसाय की कंचन को चित कर जिला केसरी बनी हैं। रविना आजाद नगर में रह रही है और आर्य रेसलिंग एकेडमी में तीन साल से प्रशिक्षण ले रही हैं।
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रविता को यूं मिली कुश्ती खेलने की प्रेरणा
रविता ने बताया कि तीन साल पहले की बात है। पड़ोस में रहने वाली निशा कुश्ती खेलती थी। जब निशा कुश्ती के लिए प्रशिक्षण पर जाती थी तो अक्सर उससे मुलाकात होती थी और उसे भी वह कुश्ती खेलने की बात कहती थी। एक दिन निशा ने रविता की माता लक्ष्मी देवी और पिता अजय कुमार को भी बेटी को कुश्ती का प्रशिक्षण दिलवाने की बात कही। उसके बाद रविता ने भी कुश्ती में दांव-पेच सीखने का मन बना लिया और कुश्ती खेलना शुरू कर दिया।
नेशनल स्तर पर 10 बार जीत चुकी पदक
रविता स्कूली लेवल से लेकर नेशनल चैंपियनशिप में बेहतरीन प्रदर्शन कर 10 बार पदक जीत चुकी हैं। यहां तक कि इंटरनेशनल स्तर की प्रतियोगिता में भी उसका उम्दा प्रदर्शन रहा है। वह बारहवीं कक्षा की छात्रा है। रविता ने बताया कि वह सुबह-शाम तीन-तीन घंटे कुश्ती का प्रशिक्षण ले रही है। रविता का कहना है कि उनका सपना इंटरनेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक लाना है।
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रविता की उपलब्धियां
- 2019 में स्कूली नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
- 2019 में जूनियर नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक।
- 2019 में कैडेट नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
उधर, पहली बार में ही जिला कुमारी बनीं अंजू
उधर, भगाना की बेटी अंजू पहली बार में ही जिला कुमारी बनी हैं। पांच साल से कुश्ती के दांव-पेच सीख रही अंजू अब तक नेशनल से लेकर इंटरनेशनल स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कई पदक जीत चुकी हैं। अंजू गंगवा स्थित सुशील कुमार एकेडमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। वर्ष 2014 की बात है, जब वह आठवीं कक्षा में पढ़ती थी तो गांव भगाना में आर्यव्रत सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कुश्ती का अभ्यास करती थी। उस समय वहां एक ही खिलाड़ी कुश्ती का प्रशिक्षण लेती थी, लेकिन आज भगाना की पांच बेटियां नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुकी हैं। इनमें मनीषा, अंजू, अंतिम, अंकुश और अंजू शामिल हैं।
अंजू की उपलब्धियां
- 2018 में जूनियर वर्ल्ड कुश्ती प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
- 2019 में जूनियर एशिया कुश्ती प्रतियोगिता में कांस्य पदक।
- 2019 में अंडर-23 एशिया कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक।

Ravita chose wrestling after seeing the girl next door, now district Kesari became third time- फोटो : Hisar

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