हिसार। करीब 33 साल बाद सावन सोमवार और नागपंचमी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। 17 अगस्त को पड़ने वाली नागपंचमी सावन सोमवार के दिन होगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन शिव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विशेष संयोग में भगवान शिव और नागदेवता की पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत और दान-पुण्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सावन मास में आने वाली नागपंचमी इस बार विशेष धार्मिक महत्व लेकर आ रही है।
सावन सोमवार और नागपंचमी के एक साथ पड़ने से शिव आराधना के साथ नागदेवता की पूजा का महत्व बढ़ गया है। मान्यता है कि नागपंचमी पर नागदेवता की पूजा करने से कालसर्प दोष, सर्प भय और अन्य बाधाओं से मुक्ति मिलती है। वहीं सावन सोमवार होने के कारण भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और व्रत रखने का भी विशेष महत्व रहेगा।
श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद भगवान शिव की पूजा करेंगे। शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल और सफेद चंदन अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद नागदेवता को दूध, हल्दी, अक्षत, पुष्प और कच्चा दूध अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना की जाएगी।
पंडित राकेश ने बताया कि इस दिन शिव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बनने से नए कार्यों की शुरुआत, धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य और विशेष पूजा के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धालु मंदिरों में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और नागपूजन कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
उन्होंने बताया कि सावन सोमवार और नागपंचमी के संयुक्त अवसर पर सुबह से ही शिवालयों में जलाभिषेक, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सावन सोमवार पर नागपंचमी का यह दुर्लभ संयोग भगवान शिव और नागदेवता दोनों की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है।