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हिसार में एकत्र हुए रामपाल समर्थक, पुलिस ने खदेड़ा

Wed, 03 Jun 2015 01:15 AM IST
hisar, Beauro
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रामपाल समर्थक मंगलवार को न तो कबीर जयंती मना पाए और न ही सत्संग कर पाए। देर से जागे प्रशासन ने कुछ घंटे पहले ही कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति रद कर दी। सुबह निर्धारित स्थान पर समर्थक पहुंचना शुरू हुए तो पुलिस हरकत में आ गई और डंडे फटकारते हुए खदेड़ दिया। पूरे मामले में समर्थकों के हाथ भले ही मायूसी लगी हो पर पुलिस व प्रशासन की लापरवाही की भी पोल खुल गई।
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रामपाल समर्थकों ने 2 जून को बड़े स्तर पर कबीर जयंती मनाने के लिए पुराने कालेज ग्राउंड में रात को ही टेंट खड़ा कर दिया था। समर्थक भी एक दिन पहले से ही जुटना शुरू हो गए थे। मामले की गंभीरता समझ पुलिस व प्रशासन में भी रात को हलचल शुरू हो गई।

इससे पहले कि रामपाल समर्थक सुबह कालेज ग्राउंड स्थल पर जुटते, उनका खेल बिगाड़ने को पहले ही पुलिस पहुंच गई। बरवाला कांड के बाद समर्थकों द्वारा ताकत दिखाने का यह पहला मौका था। पुलिस ने सवेरे ही आयोजन स्थल पर कब्जा कर लिया और वहां पहुंचे समर्थकों को खदेड़ना शुरू कर दिया।
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समर्थक जयंती मनाने के लिए अड़ गए तो पुलिस ने लाठियां फटकारते हुए उनको खदेड़ा। समर्थक बाद में मधुबन पार्क में एकत्रित हुए तो यहां भी पुलिस पहुंच गई। यहां से भी समर्थकों को हटा दिया गया। बाद में समर्थक टाउन पार्क में एकत्रित हुए, लेकिन वे यहां भी न तो कबीर जयंती मना पाए और न ही सत्संग कर पाए।

पुलिस ने ट्रेनों से रामपाल समर्थकों के आने की सूचना पर रेलवे स्टेशन को भी सुबह ही घेर लिया था। समर्थकों ने हंगामा भी किया, लेकिन बाद में पुलिस ने समर्थकों को वापस ट्रेनों में बैठाकर लौटा दिया। दोपहर तक पुलिस व रामपाल समर्थकों में लुका छिपी का खेल चलता रहा। समर्थकों ने कई स्थानों पर एकत्रित होने का प्रयास किया, पर पुलिस ने उनके प्रयासों को विफल कर दिया।
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चंद घंटे पहले हुआ भूल का आभास

रामपाल समर्थकों ने पुराना कालेज ग्राउंड में कबीर जयंती मनाने के लिए प्रशासन से पहले से ही अनुमति ले रखी थी। समर्थक चुपचाप कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे रहे।

पुलिस व प्रशासन की नींद सोमवार को तब टूटी जबकि बड़ी संख्या में रामपाल समर्थक एक दिन पहले ही शहर में पहुंचना शुरू हो गए। आयोजन स्थल पर लंबा चौड़ा टेंट भी खड़ा कर दिया गया। इस बीच विभिन्न गांवों से भी प्रशासन के पास सूचनाएं पहुंची कि समर्थक हजारों की संख्या में पहुंच सकते हैं।

पुलिस व प्रशासन ने रात को इस पर मंथन किया और रामपाल समर्थकों को कार्यक्रम न करने देने का फैसला हुआ। कार्यक्रम के चंद घंटे पहले ही कार्यक्रम का अनुमति पत्र रद कर दिया गया। कहा गया कि आयोजक सुरक्षा व कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थे।

रामपाल समर्थकों का कहना है कि बिना किसी सूचना के उनको सुबह कार्यक्रम करने से रोक दिया गया। इसके बावजूद समर्थकों का हौसला कम नहीं हुआ। कहीं स्थानों पर जुट कर उन्होंने ताकत का अहसास कराया।

बांटे पंपलेट व किताबें

रामपाल समर्थक भले ही कबीर जयंती न मना पाएं हों पर कार्यक्रम आयोजकों ने एक तीर से कई निशाने जरूर साध लिए। समर्थकों ने बंदी छोड़ संत साहेब के नारे खूब लगाए।

रामपाल जेल में है, इससे समर्थक मायूस नहीं हैं, कार्यक्रम से आयोजक इसका संदेश भी प्रशासन को दे गए। रामपाल को पाक साफ और पुलिस को खलनायक बताने वाले पंपलेट व किताबें भी इस दौरान समर्थकों को बांटे गए।

समर्थक बोले, पुलिस ने मारी लाठियां

रामपाल समर्थकों का कहना है कि पुलिस ने उनको खदेड़ने के लिए लाठियां भी बरसाई। इस दौरान कई समर्थकों को चोटें भी आई। कार्यक्रम से लौटते हुए कई समर्थकों ने चोट के निशान दिखाते हुए पुलिस को निर्दयी बताया। कहा कि उनका कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं धार्मिक था। पुलिस ने उन पर ज्यादती की।

स्टेशन बना पुलिस छावनी

रामपाल समर्थकों के भारी संख्या में उमड़ने की आशंका को देखते हुए आयोजन स्थल और रेलवे स्टेशन को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था।

रेलवे स्टेशन को तो पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया गया था। चारों दरवाजों पर पुलिस तैनात थी। कड़ी जांच और समर्थक न होने की पहचान के बाद ही यात्रियों को स्टेशन के बाहर आने दिया जा रहा था।
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स्टेशन पर जहां हजारों समर्थक थे, वहीं इतनी ही संख्या में पुलिस के जवान भी रहे। समर्थकों के खाने का इंतजाम भी आयोजकों की ओर से यहीं किया गया था।
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