एनआरसीई की ओर से विकसित लंपी प्रो-वैक्स वैक्सीन से 7वें दिन से ही एंटी बॉडी बननी शुरू हो जाती है और 14 दिन तक एंटी बॉडी बनकर तैयार हो जाती है। पूरा असर 21 से 28 दिन बाद दिखता है। इसकी तुलना में हरियाणा में लगाई जा रही गॉट पॉक्स वैक्सीन से 15 दिन बाद एंटीबॉडी बननी शुरू होती हैं और 15 से 30 दिन बाद अपना पूरा असर दिखाती है। लेकिन प्रो-वैक्स लंपी वायरस पर ज्यादा प्रभावी है क्योंकि इसे गोवंश को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है।
अब तक छह कंपनियों ने प्रो-वैक्स वैक्सीन बनाने का लाइसेंस लिया है। इनमें चार निजी और दो सरकारी एजेंसियां हैं। हालांकि वैक्सीन बनाने का काम अभी केवल एक कंपनी बायोवेट ने शुरू किया है। फिलहाल यह वैक्सीन खुले बाजार में उपलब्ध नहीं है। इसे केवल सरकारी संस्थानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। लंपी प्रो-वैक्स की कीमत को लेकर अभी कुछ तय नहीं है। अलग-अलग कंपनियां अपने हिसाब से रेट तय करती हैं। कई बार यह राज्य के हिसाब से भी कम-ज्यादा होता है। डॉ. टीके भट्टाचार्य ने बताया कि हमने लंपी प्रो-वैक्स के अधिकार आईसीएआर को दे दिए थे। आईसीएआर ने ही कंपनियों से एमओयू किया है।
वर्ष 2022 में हरियाणा में लंपी से बचाव के लिए गॉट पॉक्स वैक्सीन लगाई गई थी। इसके बाद इस साल दोबारा से वैक्सीनेशन शुरू किया गया था, यह अभी पूरा भी नहीं हुआ था कि इससे पहले ही गो वंश में लंपी की दस्तक हो गई। माना जा रहा है कि इस साल गॉट पॉक्स वैक्सीन देरी से लगाई गई। कुछ जिलों में 30 अगस्त तक भी इसका टीकाकरण किया गया। एंटी बॉडी बनने से पहले ही वायरस का प्रभाव दिखने लगा। गॉट पॉक्स बकरियों में होने वाली वायरल बीमारी है जबकि लंपी स्किन डिजीज मुख्य रूप से गाय और अन्य मवेशियों में होने वाली वायरल बीमारी है। दोनों बीमारियों के लक्षणों में त्वचा पर गांठें और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लंपी बीमारी मच्छर, मक्खी और किलनी जैसे खून चूसने वाले कीटों के माध्यम से फैलती है।
लंपी को लेकर एनआरसीई की ओर से विकसित वैक्सीन का अभी कॉमर्शियल तौर पर उपयोग नहीं हो सका है। ऐसे में उसके रिजल्ट को लेकर सटीक तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। गॉट पॉक्स को लंबे समय से उपयोग में लाया जा रहा है जिसमें 85 से 90 प्रतिशत तक बचाव के रिजल्ट हैं। गॉट पॉक्स वैक्सीन लगाए जाने के 15 दिन बाद उसका असर पशु पर दिखता है। नई वैक्सीन लंपी प्रो-वैक्स में भी 7 से 14 दिन बाद ही असर दिखता है। -डॉ. नरेश जिंदल, विभागाध्यक्ष, पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट, लुवास।