पक्के इरादों और लगन के साथ इंसान आगे बढे़ तो कायनात भी उसका साथ देती है। ऐसी ही दृढ़ निश्चय के साथ मंजिल पाई है शहर की एक कराटे खिलाड़ी प्रेक्षा मित्तल ने। प्रेक्षा ने चार साल पहले फिजिकल एक्टिविटी और सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे इस खेल में उसका मन इतना रम गया कि कराटे की एक के बाद एक प्रतियोगिता जीत कर वह आज कराटे की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बन गई है। हाल ही में प्रेक्षा ने तुर्की में हुई जिम्नासिएड वर्ल्ड स्कूल गेम 2016 में कराटे में रजत पदक हासिल किया था। इस दौरान प्रेक्षा ने ब्राजील, मोरक्को के खिलाड़ियों को धूल चटा दी थी। फाइनल मैच तुर्की के साथ हुआ, जिसमें कड़े मुकाबले में प्रेक्षा को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
जज बनना है लक्ष्य
प्रेक्षा खेल के साथ साथ पढ़ाई में भी अव्वल है। दसवीं कक्षा में 9.4 सीजीपीए हासिल किया। मूलरूप से सेक्टर 14 की रहने वाली प्रेक्षा मित्तल सैंट फ्रांसिस जेवियर स्कूल की बारहवीं कक्षा की छात्रा है। प्रेक्षा ने बताया कि वह जज बनना चाहती है। लेकिन अपने खेल को साथ लेकर चलेगी। प्रेक्षा के पिता दीपक मित्तल बिजनेसमैन हैं और मां अनुराधा मित्तल गृहिणी।
ओलंपिक की तैयारी
प्रेक्षा ने बताया कि वह केवल सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे सीखना चाहती थी। इसलिए 9वीं कक्षा में सूरज कराटे प्लेनेट में प्रशिक्षण लेना शुरू किया। प्रशिक्षण के दौरान हर बार प्रतिद्वंद्वी से जीतने के दृढ़ निश्चय ने उसे जिला स्तर पर कराटे का खिलाड़ी बना दिया। उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। जिला से राज्य स्तर और राज्य से राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बन गई। कराटे खिलाड़ी बनने में सबसे बड़ा योगदान उसके कराटे कोच हरीश सिराधना का रहा। अब वे 2020 में होने वाले ओलंपिक की तैयारियों में जुटी हुई है। 2020 में पहली बार कराटे खेल ओलंपिक में शामिल होंगे।
ये रही उपलब्धियां
- तीन बार जिला चैंपियन रही।
- दो बार स्टेट चैंपियन रही।
- 2014-15 में इंदौर में हुए नेशनल गेम में गोल्ड मेडल।
- 2015-16 में जबलपुर में हुए नेशनल गेम में गोल्ड मेडल।