हिसार। छह भाई-बहनों में सबसे छोटी पूनम ने कड़े संघर्ष के बाद अधिवक्ता बनने का सपना साकार किया। अधिवक्ता बनने तक पूनम की जिंदगी में कई बार ऐसे मोड़ आए, जब उनके पास फीस भरने तक के भी रुपये नहीं थे। पढ़ने के लिए उन्होंने मजदूरी भी की। हौसले के दम पर आज पूनम एक सफल अधिवक्ता हैं।
आर्य नगर निवासी अधिवक्ता पूनम बताती हैं कि जब वह 14 वर्ष की थीं तो उस दौरान उनके पिता का देहांत हो गया। उस दौरान वह 8वीं कक्षा में पढ़ती थीं। वर्ष 2019 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से उन्होंने वकालत की पढ़ाई पूरी की। छोटी उम्र में ही पिता का देहांत होने पर मां पर एक बड़ी जिम्मेदारी आ गई थी। उनके बोझ को कम करने के लिए उन्होंने खुद भी दूसरों के खेतों में मजदूरी की। फीस चुकाने को रुपये नहीं थे तो मजदूरी कर फीस का इंतजाम किया। पूनम ने बताया कि वह अपने गांव व आसपास के गांवों के बच्चों को निशुल्क ट्यूशन भी पढ़ाती हैं। पूनम कई सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़ी हैं। औरतों पर होने वाले अपराध के खिलाफ लड़ने के लिए वह कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़ने के साथ महिलाओं को जागरूक भी करती हैं। पूनम का कहना है कि सपनों को मरने न दें, जिंदा रखें और उन्हें पूरा करने में जुटे रहें। कामयाबी एक दिन अवश्य मिलेगी।