हांसी। केंद्र की नौकरियों में ओबीसी कोटे में स्थान मिलने पर गुरुवार को जाटों ने मय्यड़ में विजय दिवस मनाया। समारोह के दौरान कई वक्ताओं ने कांग्रेस और प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बखान किया तो किसी ने ताऊ देवीलाल की शान में कसीदे पढ़े।
आरक्षण का श्रेय कांग्रेस को दिए जाने से सभा में मौजूद कई लोगों ने हंगामा कर दिया। बाद में मंच पर बैठे अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल धारीवाल ने मामले को संभालते हुए किसी भी दल विशेष का नाम नहीं लेने की हिदायत दी।
मंच से रणधीर फौजी ने कहा कि जाटों को आरक्षण दिया जाना कोई छोटी बात नहीं है। इसके लिए जाटों को कांग्रेस सरकार का शुक्रिया अदा करना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस का कई बार गुणगान किया। कांग्रेस की हिमायत करने पर नीचे बैठे कई लोगों ने खड़े होकर विरोध करना शुरू कर दिया
भारी विरोध के चलते फौजी को माइक से हटना पड़ा। बाद में सभा में पहुंचे अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा है कि समाज के लोगों की कुर्बानियों की बदौलत ही उन्हें आरक्षण मिल सका है।
जिसकी जहां आस्था, उसे दे वोट : मलिक
यशपाल मलिक ने कहा कि हालांकि आरक्षण की इस मुहिम में तमाम दलों का साथ रहा, लेकिन कांग्रेस सरकार ने आरक्षण दिया है इसलिए उन्हें इसका श्रेय ज्यादा मिलना चाहिए
साथ ही उन्होंने साफ किया कि वे किसी दल विशेष के पक्ष या विपक्ष में कोई फतवा जारी नहीं कर रहे हैं। सैद्धांतिक रूप से जिसकी जहां आस्था है वह वहीं जुड़ा रह सकता है।
कांग्रेस का चुनावी स्टंट : धर्मपाल
समिति के प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल धारीवाल ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव आता देख आरक्षण दिया है। सीएम हुड्डा चाहते तो उस वक्त भी आरक्षण दे सकते थे, जब तीन साल पहले आंदोलन को खड़ा किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि हुड्डा ने सिर्फ रोड़ा अटकाने की कोशिशें की हैं
इससे पूर्व कई वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले युवाओं की याद में स्मारक बनाया जाए। इस अवसर पर राजमल धनाना, सुरेश कोथ, महेंद्र पूनिया, कुलदीप लाडवा, रामभगत मलिक, दीपा सरपंच, कृष्ण किरमारा, सूरत सिंह, जोगी राम, दिवान सिंह लाडवा, संतोष पानू, निर्मला दहिया, बिमला व कई अन्य मौजूद थे।
खिलाफत करने वालों को मिलेगा सबक
यशपाल मलिक ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जाट आरक्षण के दौरान खिलाफत करने वाले कई नेताओं को सबक मिल चुका है और कई को जनता अब सबक सिखाएगी। दरअसल उनसे आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार युद्धवीर ख्यालिया के संबंध में सवाल किया गया था।
ख्यालिया उस वक्त हिसार के उपायुक्त थे और वे उस समय मौके पर ही मौजूद थे जब 13 सितंबर 2010 को मय्यड़ में पुलिस की गोली से एक नौजवान की जान गई थी। मलिक से पूछा गया था कि जाट ख्यालिया के चुनाव को किस तरह से देखते हैं।