गायत्री यादव ने जयपुर पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मेरी बेटी भावना यादव एमबीबीएस थी। वह पीजी की तैयारी के लिए दिल्ली से ऑनलाइन कोचिंग ले रही थी। वह टेस्ट देने के लिए दिल्ली जाती रहती थी। 21 अप्रैल को उसके दिल्ली जाने के बाद मेरे मोबाइल पर उससे बात हुई थी। 24 अप्रैल को सुबह करीब साढ़े आठ बजे एक अज्ञात मोबाइल नंबर से मेरे पास एक फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि वह उदेश बोल रहा है। आपकी बेटी भावना जल गई है। इसके बाद सोनी अस्पताल के स्टाफ ने वीडियो कॉल कर मेरी बेटी की स्थिति दिखाई। जिसके बाद मैं हिसार के लिए निकली। मैंने हिसार सोनी बर्न अस्पताल आकर देखा कि मेरी बेटी की स्थिति गंभीर थी। उसके साथ कोई मौजूद नहीं था। अस्पताल स्टाफ यह नहीं बता सका कि उसके साथ घटना कैसे घटी और उसे यहां कैसे लाया गया। बेटी की स्थिति गंभीर देखकर उन्होंने उसे जयपुर के एसएमएस अस्पताल में रेफर किया। 24 अप्रैल की रात करीब 11 बजे उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतका की मां ने कहा उसे सूचना देने वाले लड़के पर शक है। उन्होंने बताया कि उसकी बेटी के पेट पर किसी धारदार हथियार और जलने के निशान थे।
जानकारी के अनुसार महेंद्रगढ़ जिले के रहने वाले उदेश यादव ने 24 अप्रैल को डॉ. भावना को झुलसी हालत में कैमरी रोड स्थित सोनी बर्न अस्पताल में भर्ती करवाया था। एचएयू के कंट्रोलर कार्यालय में कार्यरत क्लर्क उदेश यादव ने अस्पताल में अपने आधार कार्ड के साथ 6 हजार रुपये भी जमा करवाए थे। 24 अप्रैल के बाद से ही उदेश यादव ड्यूटी से गैरहाजिर है। भावना को अस्पताल में भर्ती करवाने के बाद वह अपने एक साथी के साथ अस्पताल से चला गया था जिसके बाद उसकी कोई सूचना नहीं है।