डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में हुए छेड़छाड़ विवाद में स्कूल प्रबंधन और पुलिस की कार्यप्रणाली पूरी तरह सवालों के घेरे में रही। इस वजह से ही नौबत तोड़फोड़ और तीन घंटे जाम तक पहुंची।
स्कूल की एक शिक्षिका ने तीन स्टाफ सदस्यों पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया और पुलिस ने तीनों आरोपियों को शिकायत दर्ज करने के दो घंटे बाद ही जल्दबाजी में मंगलवार रात को गिरफ्तार कर लिया, जबकि महिला शिक्षिका छह माह से छेड़छाड़ होने की बात कह रही है और बीस दिन पहले आईजी को भी शिकायत दी गई थी, लेकिन इसे हल्के में लिया गया।
आरोपी शिक्षकों के परिजनों का कहना है कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस ने प्रिंसिपल के दबाव में आकर कार्रवाई की है। वहीं, स्कूल की एक शिक्षिका ने प्रिंसिपल के खिलाफ छह माह पहले शिकायत दी थी, उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
यदि स्कूल का उच्च प्रबंधन दोनों मामलों को गंभीरता से लेता तो भीड़ का गुस्सा न फूटता। वहीं, सुबह 10 से लेकर तीन बजे तक स्कूल और रोड पर बवाल कटता रहा, लेकिन पुलिस उसे रोकने में पूरी तरह विफल नजर आई क्योंकि लाठीचार्ज करते भी तो किस पर, इस स्कूल में अधिकतर पुलिस वालों के ही बच्चे पढ़ते हैं।
उग्र भीड़ का कहना था कि जिन टीचरों पर आरोप लगाए गए हैं वे 14 साल से अधिक समय से यहां पढ़ा रहे हैं। जिन लोगों ने उनके चरित्र पर उंगली उठाई है उनमें पूरी साजिश प्रिंसिपल की है।
उन्होंने कहा कि गुस्सा इस बात का है कि मंगलवार शाम को महिला टीचर ने पुलिस को शिकायत दे दी और पुलिस ने बिना जांच और पूछताछ के मामला दर्ज कर उन्हें रात को गिरफ्तार भी कर लिया। वहीं, एक अन्य महिला टीचर ने प्रिंसिपल के खिलाफ अगस्त 2013 में शिकायत दी थी, लेकिन आज तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्कूल की एक टीचर ने कहा कि प्रिंसिपल ने उसे भी मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है। उसकी मानसिक प्रताड़ना से उसे गर्भपात तक की नौबत आ चुकी है। टीचर का आरोप है कि उसे बिना किसी कारण नौकरी से हटा दिया।
स्थायी नियुक्ति के बाद उसके बार-बार इंटरव्यू लिए गए। मामले की शिकायत उन्होंने अगस्त 2013 में एसपी और आईजी को भी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिर उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
तीनों स्टाफ सदस्यों के पक्ष में आए स्टाफ सदस्यों ने दावा किया है जब से प्रिंसिपल राजेंद्र सचदेवा ट्रांसफर होकर यहां आए हैं तब से स्कूल का माहौल खराब है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रिंसिपल के कहने पर महिला टीचर ने जो छेड़छाड़ का आरोप लगाया है, वह पूरी तरह से झूठा है। महिला टीचर ने प्रिंसिपल के ड्राइवर से गवाही देने का दबाव बनाया, जिसकी रिकार्डिंग उनके पास है।
महिला टीचरों ने स्कूल में हॉबी क्लासेज लगाने वाले बच्चों के रुपयों का गबन करने का भी प्रिंसिपल पर आरोप लगाया। महिला टीचरों का कहना है कि उन्होंने जब प्रिंसिपल से इन रुपयों का हिसाब मांगा तो उन्होंने यहां से निकलवाने की धमकी तक दी थी।
जिन दो टीचरों और क्लर्क पर महिला टीचर ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया है, उनमें से दो पुलिस लाइन के क्वार्टरों में रह रहे हैं और एक मिलगेट एरिया का निवासी है। अंग्रेजी टीचर नवदीप मूल रूप से नारनौंद और क्लर्क कृष्ण मय्यड़ के हैं। जैसे ही मामले का पता चला उनके पक्ष में मय्यड़ व नारनौंद से पंचायत पहुंच गई।
प्रिंसिपल राजेंद्र सचदेवा ने बताया कि उन्हें खुद मामले के बारे में सुबह पता चला कि टीचर ने केस दर्ज करवा दिया। इससे पहले जब उन्हें मामले के बारे में पता चला तो सभी को बुलवाकर मामला खत्म करने की बात कही और दोनों पक्षों की आपस में सॉरी फील करवाया।
जाम के दौरान जब भीड़ रोड से हटने के लिए राजी हुई तो एक महिला टीचर और अरोपी पक्ष से एक महिला ने पुलिस को शिकायत दी। टीचर ने शिकायत में प्रिंसिपल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया और महिला लक्ष्मी ने शिकायत में कहा कि उनके पति व दो अन्य पर लगाए गए आरोप निराधार है। झूठी शिकायत देने वालों पर मुकदमा दर्ज किया जाए।
आईजी शत्रुजीत सिंह कपूर ने कहा कि महिला टीचर उनके पास अप्रैल के प्रथम सप्ताह में शिकायत लेकर आई थी, यह सब एक दिन में नहीं हुआ। पहले मामले की पूरी तरह जांच की गई है। जिस दिन महिला टीचर शिकायत लेकर आई डिप्रेशन में थी और कहा सर में रिजाइन करने जा रही हूं।
हमारी क्राइम अगेंस्ट वुमन सेल की इंचार्ज मेवा सिंह और मैंने खुद लेडी टीचर की काउंसलिंग की। 22 अप्रैल को दोबारा हिम्मत जुटाकर महिला टीचर शिकायत देने पहुंची। इंचार्ज मेवा सिंह ने तसल्ली कर पूरी तरह जांच के बाद केस दर्ज करने के लिए लिखा। प्रिंसिपल के खिलाफ दूसरी महिला शिक्षक ने जो शिकायत दी है, उसमें केवल आरोप है।
जिन तीन स्टाफ सदस्यों पर महिला टीचर ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया है, उनमें से एक टीचर को भी म्यूजिक टीचर के साथ टर्मिनेशन नोटिस दिया गया था। टीचर की परफार्मेंस के आधार पर प्रिंसिपल की रिकमंडेशन के आधार पर ही टर्मिनेशन नोटिस वापस लिया गया था।
दस बजे जैसे ही स्कूल में हंगामा हुआ पूरे स्कूल के छात्र छात्राएं कक्षाएं छोड़ बाहर निकल आए। उन्होंने भी भीड़ में शामिल होकर प्रिंसिपल और शिकायतकर्ता टीचर के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। छात्र छात्राओं ने कहा कि नवदीप, आनंद गुप्ता और कृष्ण सर निर्दोष हैं। यह सब प्रिंसिपल की साजिश है।
तीनों आरोपियों की पत्नियों समेत सैकड़ों लोग बुधवार सुबह स्कूल में पहुंच गए। करीब 10 बजे भीड़ प्रिंसिपल कार्यालय में घुस गई। महिलाओं ने प्रिंसिपल के साथ धक्का मुक्की की। गुस्साई भीड़ और स्कूल के विद्यार्थियों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी।
प्रिंसिपल और महिला टीचर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने मांग की कि गिरफ्तार किए गए तीनों स्टाफ सदस्यों को छोड़ा जाए। केस रद हो और झूठी शिकायत दिलवाने वाले प्रिंसिपल और महिला टीचर के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो।
उधर, पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। परिजनों को जैसे ही इस बारे में पता चला वे चंडीगढ़ हाईवे पर पहुंच गए और दोपहर 12 से पौने 3 बजे तक जाम लगा दिया।
महिला टीचर की शिकायत पर तीनों स्टाफ के लोगों के खिलाफ धारा 354, 354 डी, 294, 509 के तहत मामला दर्ज किया गया है। दूसरी तरफ से एक अन्य महिला टीचर की शिकायत प्रिंसिपल के खिलाफ आई है, जिसमें यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। मामले की जांच की जा रही है।
-मनीषा चौधरी, एएसपी, हिसार