शहर का एक होनहार युवा कानून की पढ़ाई करते-करते बॉक्सिंग के पंच भी लगा रहा है। वकील माता-पिता का बेटा होने के कारण वकालत का ही माहौल मिला।
मगर बॉक्सिंग में भी अपना अलग मुकाम बनाकर शुभम शर्मा ने नई पहचान बनाई है। यह शुभम के ही पंचों की करामात है कि 41 साल बाद कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग चैंपियनशिप में ओवरऑल विजेता की ट्रॉफी मिली है।
सीआर लॉ कॉलेज का यह छात्र शुभम शर्मा सांई की तरफ से खेलता है। शहर का उभरता बॉक्सर युवाओं को प्रेरणा दे रहा है।
चार साल से लगातार हरियाणा चैंपियन
पांच साल पहले ही बॉक्सिंग के रिंग में उतरा शुभम शर्मा पिछले चार साल से लगातार हरियाणा चैंपियन हैं। ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी शुभम ने 81 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड मेडल जीता।
इससे पहले जिला व राज्य स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपने मुक्के का लोहा मनवाया है।
स्कूली शिक्षा से शुरू कर दी बॉक्सिंग
शुभम शर्मा के पिता एडवोकेट सुरेश शर्मा अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष हैं जबकि मां एडवोकेट मीनू शर्मा महिला विंग की जिला अध्यक्ष है।
अपने माता-पिता की तरह ही शुभम भी वकालत की पढ़ाई कर रहा है। स्कूली शिक्षा के दौरान ही बॉक्सिंग शुरू कर दी। सांई में बॉक्सिंग कोच महेंद्र सिंह ढाका के निर्देशन में इस खेल की बारीकियां सीखी।
बीस वर्षीय शुभम शर्मा प्रतिदिन सुबह चार बजे उठकर दस बजे तक और शाम को पांच बजे से रात नौ बजे तक अभ्यास करता है। ओलंपिक में खेलना उसका सबसे बड़ा सपना है।
बचपन से बनना था एथलीट
शुभम के पिता सुरेश शर्मा बताते हैं कि उसे बचपन से ही एथलीट बनने का शौक चढ़ा हुआ था। खेल गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेता था।
धीरे-धीरे उसका रुझान बॉक्सिंग की तरफ आ गया। उसके बाद उन्होंने भी उसके खेल को प्रोत्साहित करते हुए उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
गोभक्त और शाकाहारी
बॉक्सर शुभम शर्मा गोभक्त है और पूरी तरह से शाकाहारी है। अपनी मित्र मंडली के साथ बेसहारा गायों की सेवा करता है।
साथ ही शाकाहार के बारे में प्रचार करता है। अपने मित्रों को शाकाहारी बनने के लिए प्रेरित करता है और नशे से दूर रहने की हिदायत देता है।
सेवा का जज्बा
शुभम में राष्ट्र सेवा का जज्बा है। यह हुनर उसे अपने दादा स्वतंत्रता सेनानी वैद्य महावीर प्रसाद शर्मा से विरासत में मिला। रात के वक्त पुल के नीचे ठंड से ठिठुरते हुए व भूखे गरीबों की मदद के लिए खुद निकल पड़ता है।
घर से खाना और पुराने कपड़े लेकर गरीबों को दे देता है। इसी प्रकार एक बार बस के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने पर सभी घायल ड्राइवर को छोड़कर चलते वहीं शुभम ने हिम्मत रखते हुए ड्राइवर को बाहर निकाला।
बाद में अस्पताल तक पहुंचाकर उसके घर वालों को सूचना दी।