बरवाला क्षेत्र के गांव में हुए दुराचार मामले में गर्भवती पीड़िता के परिजनों ने दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर इस बार पीजीआईएमएस रोहतक के निदेशक को आदेश जारी कर कहा है कि तुरंत डॉक्टरों का बोर्ड गठित कर पीड़िता की जांच की जाए। डिलीवरी तक अगर पीड़िता की जान को खतरा हो तो तुरंत प्रभाव से गर्भपात किया जाए।
एमटीपी के सेक्शन-5 को दोहराया
हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट में जस्टिस के कानन की कोर्ट ने कहा कि एमटीपी (मेडिकल टर्मीनेशन एंड प्रेगनेंसी एक्ट) के सेक्शन थ्री के तहत 20 सप्ताह तक गर्भपात करवाया सकता है
तो एमटीपी के सेक्शन-5 के तहत इसके बाद का भी गर्भपात करवाया जा सकता है, अगर पीड़िता की जान को कोई खतरा हो तो।
यह था मामला
बरवाला क्षेत्र के एक गांव में 17 सितंबर को आठवीं कक्षा की 14 वर्ष की छात्रा के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था।
दुराचार करने वाला 55 वर्षीय निहाल सिंह पीड़िता का पड़ोसी ही था। मामले के बारे में तब पता चला जब छात्रा के पेट में दर्द होने पर परिजन उसे डॉक्टर के यहां चेकअप करवाने के लिए लेकर गए।
तब वह 22 सप्ताह से गर्भवती थी। परिजनों ने आरोपी बुजुर्ग के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अब पीड़िता 25 सप्ताह से ज्यादा समय से गर्भवती है।